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जनम लियो चारों भैया, अवध में बाजे बधैया…

February 27, 2026

जनम लियो चारों भैया, अवध में बाजे बधैया…

*राम जन्म का प्रसंग सुनकर श्रोता हुए मंत्रमुग्ध*
( संजीव गुप्त द्वारा )

Posted on 26.02.2026 Friday, Time 07.56 PM , Ram Katha, Vijay Kaushal ji

Shahjahanpur. मुमुक्षु आश्रम में चल रही श्री रामकथा के चौथे दिन कथाव्यास संत विजय कौशल जी महाराज ने प्रभु श्रीराम के जन्म का प्रसंग भक्तों के समक्ष इस अंदाज में प्रस्तुत किया कि श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो गए। कथाव्यास ने सुनाया कि मनु और शतरूपा ने नैमिषारण्य में हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की। इससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उनसे वर मांगने को कहा। उन्होंने कहा कि, ” हे! प्रभु हमें आपके जैसा पुत्र चाहिए।” भगवान ने उन्हें उनके पुत्र के रूप में अवतरित होने का वरदान दिया। त्रेतायुग में भगवान विष्णु प्रभु श्रीराम के रूप में अवतरित होकर राजा दशरथ के पुत्र बने। राक्षसों के आतंक से जब त्राहि त्राहि मचने लगी तो नर, नारी, ऋषि, मुनि सब भगवान से रक्षार्थ प्रार्थना करने लगे।


अवध के चक्रवर्ती सम्राट महाराजा दशरथ संतान न होने की वजह से काफी उदास रहते थे। जब वे अपने इस कष्ट तो गुरु वशिष्ठ से कहते हैं तो वे पुत्रप्राप्ति हेतु यज्ञ करते हैं। यज्ञ के प्रसाद को ग्रहण करके राजा दशरथ को तीन रानियों से चार पुत्र प्राप्त होते हैं। प्रभु श्रीराम के जन्म पर पूरे अवध में बधाइयां बजने लगती हैं। चहुंओर जय जयकार होने लगती है एवं पूरा नगर राजभवन की ओर दौड़ पड़ता है।


इसके अतिरिक्त कथाव्यास ने महाभारत का एक प्रसंग भी श्रोताओं के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जब अर्जुन और दुर्योधन दोनों प्रभु श्रीकृष्ण से मिलने गए, तो दुर्योधन अहंकारवश उनके सिराहने बैठ गया और अर्जुन उनके चरणों के पास बैठे रहे। जब प्रभु की आंखें खुलीं तो उन्होंने कहा कि मैंने पहले अर्जुन को देखा है, इसलिए मैं उसी की सहायता पहले करूंगा। अर्जुन सहायतास्वरूप प्रभु को ही मांग लेते हैं और अंततः युद्ध में उनकी जीत होती है।
“कोई घनश्याम सा नहीं देखा
जो भी देखा वो बेवफा देखा..”
इस भजन पर श्रोता मंत्रमुग्ध होकर झूमने लगे।
*पूजन, प्रसाद वितरण व आरती*
कथा के आरंभ से पूर्व व्यासपीठ का पूजन मुख्य यजमान श्री रामचंद्र सिंघल एवं श्रीमती उमा सिंघल ने किया। आरती के उपरांत हुए प्रसाद वितरण में डॉ आलोक कुमार सिंह, श्री ईशपाल सिंह, डॉ रामनिवास गुप्ता, मीरा अग्रवाल, मिथिलेश अग्रवाल आदि का योगदान रहा।

*ये संतगण रहे उपस्थित*
इस अवसर पर मुमुक्षु शिक्षा संकुल के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर श्री हरिहरानंद जी महाराज, अनंत श्री स्वामी अभेदानंद सरस्वती जी महाराज, अनंत श्री स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज, स्वामी गंगेश्वरानंद जी महाराज एवं स्वामी विवेकानंद सरस्वती जी महाराज ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

*अतिथिगण एवं अन्य उपस्थित जन*
कथा श्रवण करने हेतु शाहजहांपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री राजेश द्विवेदी, श्री अरविंद सिंह एवं श्रीमती बेबी सिंह, श्री प्रमोद चंद्र सेठ, एस.पी. सिटी श्री देवेंद्र सिंह, सीओ सिटी श्री पंकज पंत, श्री बाबूराम गुप्ता, श्री नरेश मेहरोत्रा, एडवोकेट श्री के.सी. खन्ना, श्री प्रबंध त्रिपाठी, कॉलेज प्रबंध समिति के सचिव प्रोफेसर अवनीश मिश्र सहित मुमुक्षु शिक्षा संकुल की सभी संस्थाओं के समस्त शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी तथा भारी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।

On the fourth day of the ongoing Shri Ram Katha at Mumukshu Ashram, Kathavyas Sant Vijay Kaushal Ji Maharaj presented the occasion of the birth of Prabhu Shri Ram to the devotees in such a way that the audience was mesmerized. The narrative narrates that Manu and Shatarupa performed arduous penance for thousands of years at Naimisharanya. Pleased with this, Lord Vishnu asked him to ask for a boon. He said, “Oh! Lord, we need a son like you. “God granted him the boon of being incarnated as his son. In the Treta Yuga, Lord Vishnu appeared as Lord Rama and became the son of King Dasharatha. When the terror of the demons began to strike, men, women, sages, and sages all began to pray to the Lord for protection.

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