एटा 08 जनवरी 2026 (उप्रससे) । जनपद में तहसील जलेसर अंतर्गत गांव नगला गोधी मजरा मढ़ई प्रहलाद नगर में गुरुवार को तहसीलदार संदीप सिंह द्वारा कराई गई पैमाइश ने क्रूरता की नई मिसाल कायम कर दी है। कृषि प्रधान देश में अन्नदाता लोधी समाज के किसानों और उनकी महिलाओं पर पुलिस ने तहसीलदार की मौजूदगी में ऐसी बर्बर लाठीचार्ज और मारपीट की कि एक महिला बेहोश होकर जिंदगी और मौत से जूझ रही है, दूसरी महिला की हड्डी टूटने से वह स्थायी दिव्यांग बन गई है, जबकि एक दर्जन से अधिक महिला-पुरुष गंभीर रूप से घायल हैं। यह पूरी कार्रवाई पूर्व ब्लॉक प्रमुख गीतम सिंह की पैतृक जमीन पर अवैध रूप से पैमाइश करने के नाम पर की गई, जो स्पष्ट रूप से दादागीरी और षड्यंत्र का हिस्सा लगती है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने इस जघन्य अत्याचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और शासन प्रशासन से कड़े सवाल उठाए हैं। भाकियू का कहना है कि विवादित भूमि पर कमिश्नर अलीगढ़ न्यायालय में वाद विचाराधीन है, जिसकी अगली सुनवाई 16 जनवरी 2026 को निर्धारित है।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख गीतम सिंह की पैतृक जमीन पर दबंगों द्वारा कथित दादागीरी से कब्जा करने की कोशिश। भूमि विवाद कमिश्नर अलीगढ़ कोर्ट में लंबित। गुरुवार को तहसीलदार संदीप सिंह पुलिस बल के साथ नगला गोधी मजरा मढ़ई प्रहलाद नगर पहुंचे। किसानों के विरोध पर पुलिस ने महिलाओं सहित लोधी समाज के लोगों पर बर्बर मारपीट की। एक महिला बेहोश (जिंदगी की जंग), दूसरी की हड्डियां तोड़ कर दिव्यांग किया, दर्जनों घायल। तहसीलदार पर पुलिस को उकसाने का आरोप।
एकपक्षीय कार्रवाई- पीड़ितों का मेडिकल नहीं कराया गया, जबकि तहसीलदार ने जलेसर थाने में किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। वीडियो में तहसीलदार की कार सुरक्षित दिखने के बावजूद तोड़फोड़ के झूठे आरोप लगाए गए।
भाकियू ने प्रशासन की पोल खोलते हुए उठाए सटीक सवाल
1.पीड़ित किसान गीतम सिंह (पूर्व ब्लॉक प्रमुख) की पैतृक जमीन पर बिना सरकारी बंटवारे (कुराबंदी) के किस न्यायालय के आदेश पर पैमाइश की गई?
2.कमिश्नर अलीगढ़ कोर्ट में वाद लंबित और सुनवाई की तारीख 16 जनवरी 2026 निर्धारित होने पर न्यायालय पर भरोसा क्यों नहीं दिखाया?
3.पूरे यूपी में SIR प्रक्रिया चल रही है, फिर पैतृक जमीनों की पैमाइश के लिए समय कैसे निकला?
4.यदि समय था तो जलेसर क्षेत्र में हजारों बीघा सरकारी जमीन पर माफियाओं का कब्जा क्यों नहीं हटवाया?
5.पैमाइश के लिए उपजिला मजिस्ट्रेट कोर्ट से विधिवत आदेश लेकर टीम क्यों नहीं गठित की गई?
6.मौके पर संबंधित लेखपाल क्यों अनुपस्थित था?
7.आवश्यक उपकरण जरीब न होने पर इंचटेप से पैमाइश क्यों की गई?
8.बिना लेखपाल और जरीब के सरकारी दस्तावेज कहां से आए, जिन्हें फाड़ने के झूठे आरोप लगाए गए?
9.वीडियो में तहसीलदार की कार साफ-सुरक्षित खड़ी दिख रही है, फिर कार तोड़ने का आरोप पीड़ितों पर क्यों ठोंका?
10.पीड़ितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन उनका मेडिकल क्यों नहीं कराया?
11.कैमरों के सामने पूरी घटना हुई, फिर एकपक्षीय मदद क्यों की गई?
12.तहसीलदार संदीप सिंह की जलेसर तैनाती पर हमेशा गैर-कानूनी पैमाइश और किसानों के खिलाफ साजिश क्यों रची जाती है, जिससे दर्जनों गांवों में एफआईआर हो चुकी हैं?
13.लोधी समाज के किसानों पर हो रहे इन अत्याचारों के खिलाफ भाकियू बड़ा जनआंदोलन, धरना प्रदर्शन करेगी। किसी क्षति की पूरी जिम्मेदारी तहसीलदार संदीप सिंह और उपजिलाधिकारी पर होगी।
भारतीय किसान यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि शासन ने तत्काल न्याय नहीं किया तो तहसीलदार पर मुकदमा, पीड़ितों का पूरा इलाज और क्षतिपूर्ति नहीं की तो पूरे जलेसर क्षेत्र में विशाल आंदोलन होगा। यह घटना यूपी प्रशासन की किसान-विरोधी और लोधी समाज विरोधी साजिश की नंगी तस्वीर उजागर करती है। अन्नदाताओं की महिलाओं पर पुलिसिया जुल्म बर्दाश्त नहीं किया जाएगा – शासन जागे, वरना किसान सड़कों पर उतरेंगे।
झूठ मुकदमों को लेकर कांग्रेस करेगी आंदोलन
कांग्रेसी नेता पूर्व ब्लाक प्रमुख पूर्व ब्लाक प्रमुख गीतम सिंह राजपूत एवं कांग्रेस नेत्री अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सदस्य मारहरा विधान सभा से कांग्रेस प्रत्याशी तारा राजपूत पर झूठा मुकदमा लगाकर उनके भाइयों को जेल भेजने को लेकर कांग्रेस करेगी आंदोलन
पूर्व कार्यवाहक जिला अध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी एटा,सदस्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी अनिल सोलंकी ने एटा जिले के जलेसर क्षेत्र में घटी पीड़ित महिलाओं पर हमले की घटना में न्याय सुनिश्चित करने के लिए एक उच्चस्तरीय तथा निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि इस संवेदनशील मामले की जांच या तो उत्तर प्रदेश पुलिस की अपराध शाखा (CBCID) द्वारा कराई जाए, या फिर किसी अन्य जिले की पुलिस टीम को यह जिम्मेदारी सौंपी जाए।
इस मांग का आधार घटना में सामने आए गंभीर आरोप हैं, जिनमें स्थानीय प्रशासन (तहसीलदार) और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। एक निष्पक्ष जांच ही पीड़ित परिवार को न्याय दिला सकती है और जनता का विश्वास बहाल कर सकती है। पीड़ित पक्ष के पूर्व ब्लॉक प्रमुख होने से मामले को एक राजनीतिक आयाम मिल गया है।
पीड़ित परिवार और ठाकुर अनिल सोलंकी ने आरोपियों के खिलाफ त्वरित व कठोर कार्रवाई, पीड़ितों को सुरक्षा और एक निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
