 |
 |
 |
 |
|
|
|
|
| |
|
सौभाग्य के साथ गृहस्थी
चलाने का सहारा भी बनेगा सिन्दूर
|
|
उ. प्र. समाचार सेवा
|
|
Publised
on : 08 May 2016, Last
updated Time 22:31 |
उरई।
महिलाओं के लिये पारिवारिक मामले में सौभाग्यवती होने
की निशानी माने जाने वाला सुहाग चिन्ह सिन्दूर अब उनकी
जरूरतें पूरी करने के वरदान के रूप में भी पहचान
बनायेंगा। इलाहाबाद बैक के ग्रामीण स्वरोजगार
प्रशिक्षण संस्थान ने दो दर्जन से अधिक गरीब महिलाओं
को एक सप्ताह का तरल सिन्दूर बनाने का प्रशिक्षण दिया।
तरल सिन्दूर की इस समय मार्केट मंे जबरदस्त मांग है।
जिसके कारण एक स्थानीय फैक्ट्री ने प्रशिक्षण के
तत्काल बाद ही लगे हाथों इन महिलाओं को अच्छे खासे
मेहनताने के साथ काम भी दे दिया।
ममता, परवीन, सुधा, माया, कटोरी, शीला, शैबाना, रेखा,
साधना उक्त कार्यशाला में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली
ये वे महिलायें है। जो घरों में खाना बनाने, सफाई करने
और बर्तन धोने के काम में जुटी रहती थी लेकिन फिर भी
इतनी आमदनी नहीं कर पाती थी कि पति का गृहस्थी चलाने
में मजबूती के साथ साथ दे सके। आरसेटी की निगाहें ऐसी
ही जरूरत मंद महिलाओं पर थी। निष्क्रिय पड़े स्वयं
सहायता समूह के रिकोर्ड खंगाल कर आरसेटी के समन्वयक
रोहित त्रिपाठी ने इन महिलाओं का पता लगाया और इनसे
सम्पर्क किया। पहले तो महिलायें प्रशिक्षण में भाग लेने
के लिये तैयार नहीं हुयी। महिलाओं का कहना था कि ऐसे
प्रशिक्षणों से उन्हें सर्टिफिकेट के अलावा कुछ हासिल
नहीं होता जबकि जितने दिन प्रशिक्षण चलता है उतने दिन
उन्हें काम छोड़ना पड़ता है जिससे बच्चों के लिये खाने
तक के लाले पड़ जाते है। रोहित ने महिलाओं को यह
विश्वास दिलाने में बड़ी मशक्कत की कि आरसेटी ने
प्रशिक्षण के लिये ऐसे कार्यक्रम चुने है जिनमें तुरत
फुरत रोजगार मिल सकता है। सिन्दूर प्रशिक्षण के लिये
पहले ही मार्केटिंग सर्वे करा लिया गया था। आरसेटी में
ही कुछ वर्ष पहले ही प्रशिक्षण लेकर 25 हजार रूपये से
तरल सिन्दूर के कारोबार की शुरूआत करने वाले रामजी
गुप्ता के पास आज लाखों का टर्न ओवर है। लेकिन फिर भी
वे डिमांड पूरी नहीं कर पा रहे। रोहित ने उक्त महिलाओं
के प्रशिक्षण के लिये उनका समय लिया और साथ में यह
गारन्टी भी कि अगर प्रशिक्षणाधीन महिलायें उनकी जरूरत
के मुताबिक हुनर तराश लेती है तो वें तुरन्त अपनी
फैक्ट्री में उन्हें काम भी देगें। रोहित बताते है कि
उन्हें तब बहुत खुशी हुयी जब रामजी ने बताया कि सभी
महिलायें उनके कारखाने के काम की है। उन्होंने जिस
मेहनताने की पेशकश की वह भी महिलाओं को आकर्षक लगा।
कैसे तैयार होता है
तरल सिन्दूर
तरल सिन्दूर तैयार करने के लिये रसायन बाजार से खरीदे
जाते है। यह रसायन मिलाकर पहले गर्म पानी में फूला लिये
जाते है। इसके बाद ग्राइन्डर से पीसक इन्हें मशीन और
कुप्पियों के सहारे पेन्सिल के आकार के बॉक्स में भरा
जाता है। इसमें हुनर और सावधानी की जरूरत होती है।
|
|
|
|
News
source: UP Samachar Sewa |
|
News & Article:
Comments on this
upsamacharsewa@gmail.com
|
|
|
|
|
 |
|
| |
|
|
| |
|
 |