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सुप्रीम कोर्ट का निर्णय - हरीश
रावत अब 10 मई को विश्वास मत
हासिल करें
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उत्तराख्ड में कांग्रेस के
दागियों के लिये खलनायक बनी भाजपा,
यर्थाथ से परे हाईकमान
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- भूपत सिंह बिष्ट |
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Publised
on : 07 May 2016, Last updated
Time 11:20 |
आज
सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को लोकतांंित्रक व्यवस्था
का दोहरा सबक दिया है - कांग्रेस की हरीश रावत सरकार
आगामी मंगलवार 10 मई 2016 को ग्यारह बजे सदन में
विश्वास मत हासिल करने जा रही है। विश्वास मत की
प्रक्रिया के दौरान 2 घंटे के लिए राष्ट्रपति शासन हटा
दिया जायेगा। भाजपा हाईकमान को आधी - अधूरी कानूनी
जानकारी देकर गुमराह करने वाले नेताओं की पोल पट्टी
खुलने से देश - विदेश में भाजपा की जग हंसाई हो रही
है। अब इन नेताओं के खिलाफ मोदी - अमित शाह क्या कदम
उठाते हैं ? सुप्रीम कोर्ट ने सदन में स्पीकर की
प्रभुसत्ता को स्वीकार करते हुए कांग्रेस के नौ बागियों
को विश्वास मत में भाग लेने की अनुमति नही दी है। इस
करारी चोट ने तो भाजपा का सत्ता हथियाने का खेल ही
खत्म कर दिया है। इन नौ बागियों के भरोसे ही कांग्रेस
में दल -बदल कराके भाजपा के कुछ नेताओं ने पार्टी की
साख पर बट्टा लगाया और सरकार बनाने का सपना बुना है।
इस का परिणाम आगामी चुनाव में भी भाजपा को चुकाना
लाज़मी है।
उत्तराखंड राज्य में निर्वाचित सरकार को हटाकर
राष्ट्रपति राज 27 मार्च को लगाया गया था। जबकि
राज्यपाल ने 28 मार्च को हरीश रावत को विधान सभा में
विश्वास मत हासिल करने का वक्त दिया था। नैनीताल
हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट में भी मोदी सरकार अपने
कैबिनेट निर्णय को सही साबित नही कर पायी और 3 मई को
सालिस्टर जनरल ने कंेद्र सरकार की ओर से विश्वास मत के
लिए हामी भरने का इशारा कर दिया था। आज सरकार के लिखित
प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को सदन में
विश्वास मत हासिल करने का निर्णय दिया और इस प्रक्रिया
के दौरान 2 घंटे के लिए राष्ट्रपति शासन हटाने की
व्यवस्था दी। मतदान प्रक्रिया की वीडियो रिकार्डिंग भी
की जायेगी।
कांग्रेस के नौ बागियों के भरोसे ही भाजपा ने बहुमत
का दावा भरा !
भाजपा के पास अब कोई जवाब नही है कि यदि सुप्रीम कोर्ट
में विश्वास मत के लिए हामी भरनी ही थी तो राज्यपाल के
निर्णय पर अं्रगुली उठाने से क्या हासिल हुआ ?उत्तराखंड
में भाजपा के वो कौन नेता हैं जो हाईकमान को निरंतर
गुमराह करते आ रहे हैं। आज भाजपा के पास मात्र 27
विधायक हैं और भाजपा के निलंबित विधायक भीमलाल आर्य की
सदस्यता स्पीकर ने निरस्त नही की है। अब भाजपा के इस
विधायक के बागी होने के पूरे आसार हैं। बागियों की
सदस्यता निरस्त करने का निर्णय सुप्रीम कोर्ट ने सही
ठहराया है और अब बागियों के प्रकोप से हरीश रावत साफ
बच निकले है। ऐसे नेताओं के भरोसे भाजपा 2017 का
विधानसभा चुनाव कैसीे जीत पायेगी जो हाईकमान को बहुमत
हासिल कर लेने के दिवा स्वप्न दिखाते रहे हैं ? आज
हरीश रावत के पास कांग्रेस और पीडीएफ को मिलाकर 34
विधायकों का बहुमत है और विधानसभा में नौ बागियों की
सदस्यता निरस्त होने के बाद कुल सदस्य संख्या 61 बची
है।
देवभूमि उत्तराख्ंाड में भाजपा की सत्ता पाने की होड़
अब और भी कांटो भरी हो गई है। उत्तराख्ंाड का मसला
हाईकोर्ट - सुप्रीम कोर्ट से होकर अब संसद का सत्र शुरु
होते ही लोकसभा व राज्यसभा की कार्यवाहियों में भी
सुर्खियां बटोरता रहा है। अरुणाचल प्रदेश की तुलना में
यहां भाजपा की राह में रोज नई मुसीबतें खड़ी होती रही
हैं और कांग्रेस को बैठे - बिठाये समाचारों में छाने
और भाजपा को खलनायक साबित करने के मुद्दे मिलते रहे
हैं। उत्तराख्ंाड प्रदेश की दूरी दिल्ली से कुछ घंटों
की होने के कारण यहां की हर छोटी - बड़ी घटनायें मीडिया
कवरेज में बनी रहती हैं।
कांग्रेस बागियों के साथ भाजपा का बस और हवाई सफर अब
सवालों के घेरे में ?
18 मार्च को उत्तराख्ंाड भाजपा प्रभारी श्याम जाजू का
विधानसभा में साक्षी होना एक संजोग कहा जा सकता है
लेकिन उसी रात में कांग्रेस के बागी विधायकों का भाजपा
विधायकों के साथ राजभवन में एक ही बस में बैठकर जाना
और मिलकर राज्यपाल को ज्ञापन देना गलत रणनीति साबित हो
रहा है। अब उसी रात महेश शर्मा का चार्टेड प्लेन के
साथ देहरादून हवाई अड्डे में मौजूद होना और फिर उसी
हवाई जहाज से रात में भाजपा और बागियों का दिल्ली जाना
भी मुसीबत का सबब बना है। आम चर्चा यही है कि भाजपा का
गेम प्लान 17 मार्च को ही हरीश रावत पर जाहिर हो गया
था जब भाजपा के बड़े नेताओं के देहरादून में डेरा डालने
की खबर लगी और तब कांग्रेस अपने कुछ विधायकों की बगावत
रोकने में कामयाब भी हो गई। तभी कांग्रेस विधायक गणेश
गोदियाल ने भाजपा की ओर से करोड़ों रुपये की पेशकश का
दावा इलैक्ट्रानिक चैनलों पर किया था।
भाजपा को भीतरघात और दूसरे भीमलाल का डर भी सताता
है !
भाजपा ने अपने विधायक भीमलाल आर्य को मुख्यमंत्री हरीश
रावत से निरंतर नजदीकियां बढ़ाने के कारण पहले से ही
निलंबित किया हुआ था और अब विधायकी समाप्त करने का
आवेदन भी स्पीकर गोविंद सिंह कुजंवाल से कर दिया है।
18मार्च के ठीक पहले बजट सत्र के दौरान भाजपा विधायकों
को देहरादून के होटलों में रोका गया था ताकि सरकार
गिराने की मुहिम में अपने खेमे से ही कोई चूक न कर दे।
फिर इसी क्रम में भाजपा ने अपने सीनियर विधायकों को भी
18 मार्च के बाद हरीश रावत की पहुंच से दूर दिल्ली -
जयपुर - पुष्कर आदि स्थानों पर शिविर बनाकर रखा। यदि
बगावत कांग्रेस पार्टी में थी तो भाजपा ने भी अपने
विधायकों पर अविश्वास जाहिर कर उत्तराख्ंाड क्षत्रपों
की क्षमताओं पर ही प्रश्न चिह्न लगा दिये थे।
नारायण दत तिवारी के मुख्यमंत्री रहते उत्तराख्ंाड
भाजपा के बड़े नेताओं और विधायकों ने सत्ता के साथ
गलबहिया डालने और रेवडि़यां बटोरकने की शुरुआत की थी।
इसी कारण वर्ष 2012 में भाजपा ने पहले विधायक किरन
मंडल को खोया और अब भीमलाल आर्य की विधायकी निरस्त करने
का आवेदन स्पीकर से किया था। जिसे स्पीकर ने अस्वीकार
कर दिया है। सत्तर सीट वाली उत्तराख्ंाड विधानसभा में
भाजपा का अपने दो विधायकों से हाथ धो बैठना बड़ी
राजनीतिक व संगठन की चूक है।
चुनावी साल में कांग्रेस के फटे में हाथ डालना कैसी
रणनीति ?
वर्तमान उत्तराख्ंाड भाजपा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष
रहे अजय भट्ट निरंतर हरीश रावत की शराब नीति पर मुखर
रहे हैं। बागी हरक सिंह रावत की सदस्यता निरस्त करने
के लिये भट्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट में एक से अधिक लाभ
के पद पर रहने का आरोप लगाया था। बाद में कांग्रेस
सरकार ने उन पदों को लाभ के दायरे से मुक्त करने के
लिए विधानसभा में कानून ही पास कर दिया। केदारनाथ आपदा
कार्यों में भ्रष्टाचार और धांधली भाजपा का प्रमुख
आरोप रहा है और पूर्व उत्तराख्ंाड भाजपा अध्यक्ष और
विधायक तीरथ सिंह रावत केंद्र की राहत सहायता को खुर्द
बुर्द करने का आरोप तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा
की सरकार पर निरंतर लगाते रहे हैं और इन आरोपों की
पुष्टि आडिटर्स ने भी की है। इस के अतिरिक्त खनन
माफिया,शराब माफिया, रेत -बजरी और ट्रांसफर माफिया का
सरकार के संरक्षण में सक्रिय होने की प्रमुख शिकायत
भाजपा को रही है। फिर ऐसे बागी और दागी कांग्रेसियों
को अपना संरक्षण देने की मंजूरी भाजपा हाईकमान ने कैसे
दे दी ?
आज अपनी विधायकी बचाने के लिए यही बागी खुद को सच्चा
कांग्रेसी बताने का दावा हाईकोर्ट - सुप्रीम कोर्ट में
करते रहे और कोर्ट ने उनके तर्क नही माने हैं। सवाल यह
है कि कांग्रेस के दल - बदल पर भाजपा ने सरकार को
बर्खास्त कर आखिर किस को लाभ पहुंचाया ? इस शर्मनाक
तमाशे के बाद अगर हरीश रावत यदि अपनी सरकार बचा भी लेते
तो जनता में यही संदेश जाता कि कांग्रेस पार्टी के
नेताओं में सत्ता के लिए लूट खसोट और चाल - चरित्र सब
कुछ संदेहस्पद है। पहाड़ में रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा
- चिकित्सा, रोजगार और विकास की बयार ना बहने से
कांग्रेस सरकार के प्रति आम जनता का मोह भंग हो चुका
था। पिछले दरवाजे से सत्ता पाने की होड़ में भाजपा ने
सब गुड़ गोबर कर दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी की लहर के बीच उत्तराख्ड में
भाजपा तीनों उपचुनाव हारी !
प्रधानमंत्री मोदी की सुनामी में जहां भाजपा
उत्तराख्ंाड की पांचों लोकसभा सीट भारी मतों से जीतने
में कामयाब रही लेकिन रमेश पोखरियाल निशंक और अजय टमटा
के लोकसभा सांसद बनने पर उनकी विधायक सीटों को भाजपा
ने उपचुनावों में गंवा दिया था। ऐसे में हरीश रावत अब
भाजपा से फिर वरदान पा गये लगते है - एक तो भाजपा ने
हरीश रावत को धुर विरोधियों से मुक्ति दिलाकर कांग्रेस
में उनका रास्ता एकदम साफ कर दिया है। जैसे अब सतपाल
महाराज, हरक सिंह रावत , विजय बहुगुणा, कुंवर प्रणव
चैंपियन, अमृता रावत आदि और उन के चेलों को आगामी
चुनाव में कांग्रेस के टिकट ना मिलने से हरीश रावत का
विरोधी खेमा बिलकुल ही बेजान हो गया है। दूसरे अब हरीश
रावत मोदी और आरएसएस पर अपनी कल्याणकारी सरकार गिराने
के आरोप लगाकर कांग्रेस हाईकमान की नज़र में जगह बनाने
में कामयाब रहे हैं। भाजपा के इस दॉव से कुमायूं मंडल
में हरीश रावत को गहरी सहानुभूति और गढ़वाल मंडल में
अपने वफादारों को आगे बढ़ाने का अवसर भी मिल गया है।
जुलाई के पहले सप्ताह में राज्यसभा सांसद तरुण विजय का
कार्यकाल समाप्त हो रहा है और इस से पहले इस सीट पर
चुनाव होना है। अभी तक राज्यसभा की तीन सीटों में दो
पर कांग्रेस का कब्जा है। यदि भाजपा ने राज्यसभा में
अपनी सीटों को बढ़ाने के लिए प्रदेशों में भी बहुमत
बढ़ाने का अभियान शुरु किया है तब भी यह रणनीति भाजपा
की साख पर बट्टा लगाने वाली रही है।
विश्वास मत हासिल करने के बाद हरीश रावत अब पहले चुनाव
में जा सकते हैं!
कंग्रेस के इतर हरीश रावत के पक्ष में एक सहानुभूति की
लहर और भाजपा के सत्तालोलुप होने के आक्षेप अगले चुनाव
में निर्णायक होने वाले हैं। हरीश रावत बार - बार अपनी
सरकार को गिराने के लिए विधायक खरीदने वाले बाहरी
गिद्धों पर अंगुली उठाते हैं।
उत्तराखंड में बाहरी और पहाड़ी का नेतृत्व भी मुद्दा
बनाया जा रहा है।
पहाड़ के चिंतक शराब - खनन - ज़मीन और रियल स्टेट
माफियाओं के बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप को उत्तराख्ंाड
की इस दुर्दशा का जिम्मेदार मानते हैं। समय रहते भाजपा
हाईकमान को नये सिरे से उत्तराख्ंाड के लिए प्रभारी
बनाने चाहिए जो कि पहाड़ की संस्कृति और समस्याओं को
महानगरों में बैठककर ना आंके बल्कि सुदूर पर्वतीय अंचलों
तक अपनी पहंुच बनाकर संगठन को और ज्यादा चुस्त -
दुरुस्त करें। अन्यथा उत्तराख्ंाड में गहरी पैठ बनाये
हरीश रावत के नेतृत्व में भाजपा को 2017 के चुनाव में
कड़ी चुनौती का सामना करना तय है। हरीश रावत अब तक के
तीन विधान सभा चुनावों में दो बार सफलता प्राप्त कर आगे
चल रहे हैं। देवभूमि उत्तराख्ंाड में कुछ नेताओं की
हठधर्मिता और कुटिलता भरी चालों ने भाजपा को अब नायक
से खलनायक बना दिया है।
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source: UP Samachar Sewa |
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