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देहरादून,
19 सितम्बर। उत्तराखण्ड मे इस सप्ताह हुईं
बादल फटने की चार घटनाओं में भारी जनहानि
हुई है। राज्य सरकार द्वारा घोषित हानि के
विवरण के अनुसार कुल 75 लोगों की जानें चली
गई हैं। इनमें 56 लोगों की मृत्यु की
पुष्टि सम्पंधित जिलों के अधिकारियों ने
कर दी है जबकि करीब 20 लोग अभी तक लापता
हैं। इनके भी जीवित होने की संभावना
अत्यधिक कम है।
राज्य के आपदा
प्रबंधन विभाग द्वारा जारी जानकारी के
अनुसार लगभग 150 छोड़े और बड़े पशुओं की
मृत्यु हो गई है जबकि एक सौ से अधिक घर
पानी से टूट गए हैं। इस कारण हजारों लोग
बेघर हो गए हैं। राज्य के रुद्रप्रयाग जिले
की ऊखीमठ तहलील में 14 सितम्बर रात्रि
करीब साढ़े बारह बजे बादल फटने से प्रचण्ड
वर्षा हुई थी। इस बारिश ने सबसे ज्यादा
तबाही मचाई। ग्राम किमाणआ, जुआतोक,चुन्नी,
मंगोली,संसारी,ब्राह्मणखोला, तोक,
प्रेमनगर तोक सबसे ज्यादा तबाही हुई है।
जबकि 16 सितम्बर को तहसील जखोली अन्तर्गत
ग्राम डूंगर सेमला, किरोड़ामल्ला,तिवाड़ा
तिमली में जन धन की भारी तबाही हुई। ग्राम
किरोड़ीमल्ला मे दोपह करीब ढाई बजे बादल
फटा था। यहां श्रीनगर गढवाल से पीएसी भेजी
गई जिसने बचाव कार्य किया। जिलाधिकारी ने
स्वयं मौके पर पहुंचकर बचाव कार्यों का
निरीक्षण किया।
तिलवाड़ा तिमली में
16 सितम्बर को ही बादल फटने से भारी वर्षा
के कारण के मन्दिर बह गया। इसके साथ ही एक
साधू और साध्वी भी वह गए थे। इसमें से साधु
का शव प्राप्त हो गया है किन्तु साध्वी का
शव नहीं मिल सका है। बजाव और राहत के लिए
43 सदस्यीय दल सक्रिय है। जिला प्रशासन
द्वारा दो राहत शिविर संचालित किये जा रहे
हैं। इन शिविरों में 550 व्यक्तियों को
आश्रय प्रदान किया गया है। इनके अलावा आपदा
प्रभावित 460 लोग राजकीय इंटर कालेज ऊखीमठ
में रह रहे हैं। इसी प्रकार भारत सेवा
आश्रम ऊखीमठ में भी 90 व्यक्तियों को
आश्रय प्रदान किया गया है।
बादल फटने से
चारधाम यात्रा प्रभावित, यमुनोत्री मार्ग
बंद
उत्तराखण्ड में
बादल फटने की घटनाओं के चलते चार धाम
यात्रा भी प्रभावित हुई है। मलवा आने कारण
ऋषिकेश-यमुनोत्री मार्ग पूरी तरह से
अवरुद्ध है। यह मार्ग बाडिया में मलवा आने
से अवरुद्ध हुआ है। जबकि ऋषिकेश-केदारनाथ
मार्ग, ऋषिकेश-गंगोत्री मार्ग और
ऋषिकेश-बद्रीनाथ मार्ग खुल गए हैं।
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