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वाराणसी।
मुसलमान वोटों के लिए कांग्रेस के दो
दिग्गज नेता मुख्तार अंसारी परिवार के
सामने गिड़गिडाए। इन दोनों नेताओं ने कौमी
एकता दल का समर्थन अजय राय को दिलाने के
लिए ऐडी चोटी का जोर लगा दिया। आखिरकार
मंगलवार को कौमी एकता दल के अफजाल अंसारी
ने कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय को समर्थन
देने की घोषणा कर दी। हालांकि अफजाल के
छोटे भाई मुख्तार अंसारी और अजय राय के
बीच छत्तीस का आंकड़ा है। पूर्वांचल की
दबंगई में दोनों एक दूसरे के प्रतिद्वन्दी
के रूप में जाने जाते हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा समर्थन
मांगे जाने की जानकारी मंगलवार को पत्रकारों
से बातचीत में कौमी एकता दल के अध्यक्ष
अफजाल अंसारी ने खुद ही दी। इस दौरान
उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया कि
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद
उनसे मिले और राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय
सिंह ने उनसे फोन पर समर्थन मांगा। अफजाल
अंसारी ने बताया कि उन्होंने भाजपा के
प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेन्द्र
मोदी को हराने के लिए कांग्रेस को समर्थन
दिया है।
यह पूछे जाने पर कि राय को समर्थन देने के
लिए कांग्रेस के किस नेता ने उनसे संपर्क
किया था तो अंसारी ने कहा, ‘‘आप कांग्रेस
नेता दिग्विजय सिंह का नाम मुझसे संपर्क
करने के लिए मान सकते हैं।’’ अंसारी ने कहा
कि कांग्रेस का उम्मीदवार शहर का है और
मोदी और आप नेता केजरीवाल ‘‘बाहरी’’ हैैं।
इसके अतिरिक्त राय चार बार विधायक रहे हैं
और उनकी शहर के मतदाताओं पर मजबूत पकड है।
अफजाल अंसारी के भाई मुख्तार अंसारी पिछला
चुनाव बसपा के टिकट पर वाराणसी से लडे थे
और भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी
से तकरीबन 17 हजार मतों के अंतर से हार गए
थे।
मुख्तार अंसारी को बाद में बसपा से
निष्कासित कर दिया गया था और उन्होंने कौमी
एकता दल का गठन किया था और उनके भाई अफजाल
अंसारी को पार्टी का प्रमुख बनाया गया था।
मुख्तार भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की
हत्या के मामले में आगरा जेल में बंद हैं
और उत्तर प्रदेश के मउ जिले में घोसी से
2014 का लोकसभा चुनाव लड रहे हैं। अजय राय
और मुख्तार अंसारी की पुरानी
प्रतिद्वंद्विता है और यह आरोप लगाया जाता
है कि मुख्तार अजय राय के बडे भाई अवधेश
राय की शहर में एक दशक से अधिक समय पहले
हुई हत्या की साजिश में शामिल थे। अफजाल
अंसारी ने कहा कि राय के साथ पुरानी
शत्रुता के बावजूद उनके लिए पवित्र शहर
वाराणसी अधिक महत्वपूर्ण है और इसलिए
उन्होंने राय के साथ दुश्मनी भूलने का
फैसला किया है और वाराणसी से मोदी को हराने
और उन्हें प्रधानमंत्री बनने से रोकने पर
ध्यान केंद्रित है। |