नई दिल्ली।
विश्व हिन्दू परिषद् में शनिवार को नया इतिहास
लिखा गया। परिषद् के 54 साल के इतिहास में पहली बार
मतदान के द्वारा अन्तरराष्ट्रीय अध्यक पद पर पूर्व
राज्यपाल जस्टिस (सेवानिवृत्त) विष्णु सदाशिव कोकजे
पदासीन हुए। उन्होंने दो बार से अन्तरराष्ट्रीय
अध्यक्ष पर मनोनीत होते रहे राघव रेड्डी को पराजित
किया। नवनिर्वाचित अध्यक्ष जस्टिस कोकजे अभी तक
परिषद् के उपाध्यक्ष थे। विश्व हिन्दू परिषद् ने
विधिवत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कोकजे के निर्वाचन
की घोषणा की।
रेड्डी नहीं तोगडिया हारे
चुनाव में पराजय
निर्वतमान अध्यक्ष राघव रेड्डी की नहीं बल्कि वस्तुतुः
यह पराजय कार्यकारी अध्यक्ष डा. प्रवीण भाई तोगड़िया
की है। उनका परिषद् के अन्य पदाधिकारियों के साथ
लम्बे अरसे से टकराव चल रहा था। वह भी दो बार
कार्यकारी अध्यक्ष रहे हैं। इसके पहले तोगडिया परिषद्
के महामंत्री थे। लेकिन, तोगड़िया ने अन्तरराष्ट्रीय
अध्यक्ष पद पर तीसरी बार राघव रेड्डी के मनोनयन की
जिद कर ली थी। क्योंकि वह स्वयं भी कार्यकारी
अध्यक्ष पद पर बने रहना चाहते थे। यह तभी संभव था जब
रेड्ड़ी अध्यक्ष बने रहें। डा तोगडिया लम्बे समय तक
विहिप के प्रमुख पद पर रहे हैं और परिषद् में फायर
ब्रांड नेता के रूप में पहचाने जाते रहे। उनका
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ टकराव भी जग
जाहिर है। डा. तोगडिया ने प्रधानमंत्री के साथ टकराव
और उनके विरोध में विहिप की प्रतिष्ठा को भी दांव पर
लगा दिया था।
अलबत्ता बिहिप
में एक पदाधिकारी के दो बार से अधिक एक पद पर बने
रहने पर रोक के लिए चर्चा स्व. अशीक सिंहल के समय से
ही चल रही थी। यह विचार जब एक बार अशोक जी के सामने
आया तो उन्होंने स्वयं ही अपना त्यागपत्र पदाधिकारियों
को सौंप दिया था। इस विचार को आगे बढ़ाते हुए विहिप
ने तय किया था कि अब अध्यक्ष राघव रेड्ड़ी के स्थान
पर किसी नये व्यक्ति का चयन किया जाए। लेकिन,
इस विचार को कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोग़डिया ने
नकार दिया। अन्ततः भुवनेश्वर में हुई दिसम्बर 2017
की बैठक में ही चुनाव की नौबत आ गई। इसे तब अप्रैल
तक के लिए टाल दिया गया।
भुवनेश्वर बैठक
के फैसले के अनुसार 13 व 14 अप्रैल को चुनाव के लिए
गुरुग्राम में प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया।
यहां 13 अप्रैल को हुए मतदान का परिणाम 14 अप्रैल को
घोषित किया गया। इसमें जस्टिस
विष्णु
सदाशिव कोकजे को 131 तथा राघव रेड्डी को 60 वोट मिले।