|
Home>News> |
|
भारतीय संस्कृति और कोरोना वायरस |
|
#
डा अपूर्वा अवस्थी |
|
Publised on 17.03. 2019 ,
Updated at 09:10, Sunday |
|
Tags:#Indian Culture & #Corona Virus , Author Name: #Dr.Apoorva Avasthi |
|
कोरोना वायरस के प्रकोप से समूचा विश्व त्राहिमाम् त्राहिमाम् कर रहा है। मानवता पर अभूतपूर्व संकट है। विश्व के विकसित और स्वयं को महानतम राष्ट्र मानने वाले भी कोरोना के आगे नतमस्तक हैं। वहीं दूसरी मानवीय, आध्यात्मिक और प्रकृति प्रदत्त मूल्यों पर आधारित सांस्कृतिक धरोहर को संजोए भारत कोरोना
से मुकाबला कर रहा है। यहां कोरोना का प्रकोप यदि अन्य देशों की अपेक्षाकृत काफी कम है, और यह कहा जाए कि अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन, रूस और फ्रांस के मुकाबले तो नगण्य ही है तो इसका कारण भारतीय संस्कृति में विद्यमान नैतिक मूल्य और सदाचार के तत्व ही हैं। जिनके कारण हम कोरोना को सबसे पहले पराजित करने की ओर
अग्रसर हैं। यही वजह है कि आज विश्व की निगाहें भारत की ओर हैं। इन्हीं सासकृतिक मूल्यों, और प्राकृतिक धरोहर के महत्व पर आधारित डा. अपूर्वा अवस्थी का आलेख "भारतीय संस्कृति और कोरोना वायरस" यहां प्रस्तुत है। संपादक |
|
भारतीय संस्कृति
सदैव सबको साथ लेकर चली है। हमारे पूर्वजों ने हमें यही सिखाया है कि अपने साथ दूसरों का भी ध्यान रखना चाहिए। केवल अपना पेट भरने वाला कभी सुखी नहीं रहता । भारतीय संस्कृति के मूल में यही भावना विद्यमान है।
आज संपूर्ण विश्व करोना जैसी महामारी से परेशान है। लोग भयभीत हैं अपने घरों में बंद है ऐसे में भारत में जिस प्रकार इस महामारी से लोगों ने कार्य किया है वह अत्यंत प्रशंसनीय है और इसमें हमारे भारतीय संस्कृति और संस्कार की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के एक आवाहृन पर
लोगों ने अपनी परवाह न करते हुए भोजन, पानी की व्यवस्था की । हमारे देश की पुलिस का एक नया चेहरा सामने आया जो गरीबों और बेसहारा लोगों का सहारा बने। हमारे डाक्टर, हमारी नर्से, सफाई कर्मचारी सभी ने इस प्रकार अपना दायित्व निभाया कि हमको एक दिन उनके सम्मान में तालियां बजानी पड़ी। हमारा युवा वर्ग
जो पश्चिमी सभ्यता से प्रभावित था उसने इस समय अपनी अद्भुत प्रतिभा का परिचय दिया । मोबाइल और इंटरनेट का प्रयोग करके अपने माता-पिता और सभी को आपस में जोड़ दिया। इस समय को बेहतर बनाने के लिए नये नये ऐप खोजेऔर कयी नये अविष्कार भी किये। हमारे देश के बच्चों ने भी इस समय को बड़ी समझदारी से निकाला
ना ही कोई जिद ,ना बाजार का खाना केवल मां के हाथ का खाना और घर के अंदर ही खेलकर, पेंटिंग बनाकर सबको खुश किया।
हमारे प्रधानमंत्री ने पहले से ही जो स्वच्छता,का मंत्र दिया वह इस समय बहुत काम आया। वसुधैव कुटुंबकम् की भावना से भारत ने अन्य देशों को भी दवाईयां दी। हमारे देश की महिलाओं ने भी इस समय बहुत ही धैर्य से अपने घर, परिवार का ध्यान रखा और बाजार के खाने को घर में ही बनाया और सबको खुश रखा। समय की
गति बहुत तीव्र है आने वाला समय अच्छा होगा इसी कामना से हम भारतीय अपनी संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहें हैं निश्चित ही विजय हमारी ही होगी

असिस्टेंट प्रोफेसर, नवयुग कन्या महाविद्यालय,
राजेंद्र नगर, लखनऊ
Mob.
9794118960
|
|
श्रीरामजन्मभूमि संघर्ष
और सत्याग्रह आन्दोलन |
अयोध्या विवादः जानें क्या है इलाहाबाद हाईकोर्ट का
फैसल |
|
श्रीरामजन्मभूमि संघर्ष का इतिहास-छह |
श्रीरामजन्मभूमि संघर्ष का इतिहास-पांच |
|
श्रीरामजन्मभूमि संघर्ष का इतिहास-चार |
श्रीरामजन्मभूमि संघर्ष का इतिहास-तीन |
|
Sri Ram Janmbhoomi Movement Facts & History |
श्रीरामजन्मभूमि संघर्ष का इतिहास-दो |
|
श्रीरामजन्मभूमि संघर्ष का इतिहास
एक |
राम जन्मभूमि मामलाःकरोड़ों लोगों की
आस्था ही सुबूत
|
|
Comments on this News & Article:
upsamacharsewa@gmail.com |