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जिला जज ने देहज हत्या के फैसले में
आजावीन कारावास की सजा के साथ लिखा
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अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आंचल
में है दूध और आंखों में पानी |
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Tags: उत्तर प्रदेश समाचार सेवा,
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NEWS |
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Publised
on :
2011:08:14
Time 18:00
Update on
2011:08:14
Time 18:00 |
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पीलीभीत,
14 अगस्त। (रेनू सिंह- उप्रससे)। जिला जज
अनिल कुमार शर्मा ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण
गुप्त की ये पंक्यिां लिखीं- अबला जीवन
हाय तुम्हारी यही कहानी, आंचल में है दूध
और आंखों में पानी। . . . . और इसके बाद
लिख दिया दहेज हत्या के मामले में फैसला।
श्री शर्मा ने दहेज हत्या के आरोपियों
मृतका के पति और उसकी जेढानी को आजावीन
कारावास की सजा सुना दी। सास-ससुर समेत
चार आरोपियाें को दोष मुक्त किया गया है।
थाना सुनग़ढी के भिलैया गांव निवासी फूलमती
ने 18 अगस्त 2008 को रिपोर्ट दर्ज कराई।
जिसके अनुसार वर्ष 2005 में पुत्री देववती
का विवाह गांव नवदिया दहला निवासी छोटेलाल
के पुत्र अरविंद के साथ हुआ। दहेज में 50
हजार रुपये नगद और कलर टीवी की मांग को
लेकर देववती का उत्पीड़न किया गया। 10
सितंबर 2006 को उसे पीटकर ससुराल वालाें
ने घर से निकाल दिया। इस पर भरण पोषण का
मुकदमा कोर्ट में हुआ। 16 सितंबर 2008 को
पति देववती को लिवा ले गया। 19 अक्तूबर को
मुकदमे की तारीख थी। उससे एक दिन पहले ही
पति, ससुर, जेठ रमेश, जेठानी मिथलेस,
जेठानी लौंगश्री और सास चंद्रवती ने देववती
को मारापीटा। मिट्टी का तेल छिडककर आग लगा
दी। गंभीर रूप से जली विवाहिता को जिला
अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में उसकी
मौत हो गई। पुलिस ने सभी के खिलाफ दहेज
हत्या की रिपोर्ट लिखी।
नायब तहसीलदार अरुण मिश्रा ने मृत्यु
पूर्व बयान लिखे। जिसमें देववती ने पति और
जेठानी मिथलेस पर जलाने का आरोप लगाया।
पुलिस ने पति सहित छह ससुराल वालाें के
खिलाफ चार्जशीट लगाई। सुनवाई के दौरान
मृतका की मां सहित सभी मायके वाले अभियोजन
कहानी से मुकर गए। किसी भी गवाह ने घटना
का समर्थन नहीं किया। जिला शासकीय अधिवक्ता
अपराध गुफरान अली रिजवी ने मृत्यु पूर्व
बयानाें की ओर कोर्ट का ध्यान दिलाया। जिला
न्यायाधीश अनिल कुमार शर्मा ने 34 पन्नों
का निर्णय सुनाया। जजमेंट की शुरुआत
मैथलीशरण गुप्त की पंक्तियाें से की-
अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी।
आंचल में है दूध और आंखां में पानी॥
न्यायालय ने निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय
के सत्यनरायण तिवारी बनाम जौली नामक केस
में दिए गए ताजे फैसले का उल्लेख किया है।
कहा है कि कि मैथलीशरण गुप्त की एक शताब्दी
पुरानी रचना महिलाओं के बारे में आज भी सही
है। युवा नारियां पतियाें द्वारा मारी जा
रही है। जिला न्यायाधीश अनिल कुमार शर्मा
ने अरविंद और मिथलेस को उम्रकैद की सजा के
साथ जुर्माना भी किया।
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