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प्रकृति और मनुष्य

# डा अपूर्वा अवस्थी

Publised on 24.03. 2019 , Updated at 13:00, Sunday

Tags:#Indian Culture & #Nature & Human Beeing , Author Name: #Dr.Apoorva Avasthi

प्रकृति का रूप प्रतिक्षण परिवर्तित होता है। आदिकाल से प्रकृति हमारी संगिनी रही है। हमारे सुख ,दुख लाभ-हानि,यश अपयश में हमारी साक्षी रही। प्रकृति की पूजा उपासना भी हमारे धर्म और संस्कृति का मुख्य भाग रहा है। हमारी भारतीय संस्कृति में जितने भी त्योहार है सब प्रकृति से जुड़े हैं। हमारा खान-पान भी प्रकृति पर आधारित है ।हम ये कह सकते हैं कि हमारा जीवन ही प्रकृति के कारण है।
हमने आधुनिकता की दौड़ में प्रकृति का तिरस्कार किया । पेड़ काट कर भवन निर्माण किया । नदियों का जल सूख गया हमने नदियों को दूषित किया । धीरे, धीरे हमारे सामने अनेक ऐसी समस्याएं आने लगीं जो किसी ना किसी रूप में प्रकृति से जुड़ी थीं। हमने पेड़ लगाने छोड़ दिए तो हमारे हृदय से परोपकार की भावना समाप्त हो गई। हमने फूल गमलों में वो उगाए जिनमें खुशबू नहीं केवल सुंदरता या कृत्रिमता थी हमारी संवेदनाएं दूर होती गयीं। हमने नदियों झीलों,झरनों की जगह बड़े बड़े स्वीमिंग पूल का प्रयोग किया हमारी त्वचा खराब होने लगी। इसी प्रकार सांस संबंधी अनेक बीमारियों ने हमें घेर लिया । यह सब प्रकृति से दूर होने के कारण ही हुआ।
हमारी संस्कृति में सूर्य पूजा, चंद्र पूजा, गंगा स्नान, पीपल पूजा , बरगद पूजा,नीमकी पूजा आंवला नवमी, का विशेष महत्व है। वर्ष में एक बार होने वाले इन त्योंहारो का संबंध हमारे मन , हमारे स्वास्थ्य से है। इन वृक्षों के नीचे बैठकर पूजा करना ,फल का। पत्ती का सेवन करना हमारे उत्तम स्वास्थ्य का आधार है। इन सभी में औषधीय गुण होते हैं।
हमें प्रकृति से जुड़ी हर बात को अपनाना ही होगा तभी हम अपना विकास कर सकेंगे। हम जब भी इससे दूर होंगे हमारा पतन निश्चित है।
हम अपने साहित्य पर नजर डालें तो हम देखते हैं कि सभी कवि और साहित्यकारो ने प्रकृति को अपनी सहचरी बनाया है। कवियों ने ऋतु वर्णन को महत्व दिया है ‌। पंत जी को प्रकृति का सुकुमार कवि कहा जाता है। परिवर्तन, मौन निमंत्रण और नौका विहार जैसी कविताओं में उनका प्रकृति के प्रति प्रेम। दिखता है। नजाने नक्षत्रों से कौन, निमंत्रण देता मुझको मौन कहकर कवि उस अदृश्य शक्ति की ओर संकेत करता है।
हमें अपने विकास साथ प्रकृति की रक्षा करना चाहिए उसमें छुपे थे तत्व को ग्रहण करके ही आगे बढ़ने का संकल्प लेना चाहिए ।
Apoorva Avasthi Dr. Navyug College Rajendra Nagar Lucknow
असिस्टेंट प्रोफेसर, नवयुग कन्या महाविद्यालय,

राजेंद्र नगर, लखनऊ

Mob. 9794118960

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