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Ram Mandir Trust नई दिल्ली,
05 फरवरी 2020, ( यूपी समाचार सेवा
UP Samachar Sewa)।अयोध्या में
श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण के
लिए ट्रस्ट की घोषणा केन्द्र सरकार ने
बुधवार को लोकसभा में कर दी।
ट्रस्ट का नाम श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ
क्षेत्र ट्रस्ट होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्रस्ट
के गठन की जानकारी दी। जबकि गृहमत्री
अमित शाह ने बताया कि ट्रस्ट में 15
सदस्यों को शामिल किया गया है। इसके
पीएम ने बताया कि इसके पहले कैबिनेट
की बैठक में ट्रस्ट के गठन को स्वीकृति
प्रदान की गई थी।
सरकार ने इसके साथ ही संसद में यह भी
घोषणा कि अयोध्या अधिनियम 1993 के
अन्तर्गत अधिग्रीत सम्पूर्ण भूमि जोकि
67.70 एकड़ है वह भी इस ट्रस्ट को
सौंपने का निर्णय लिया गया है।
ज्ञातव्य है कि नौ
नवम्बर को सर्वोच्च न्यायालय ने
श्रीरामलला विराजमान के पक्ष में फैसला
सुनाते हुए सरकार को निर्देश दिया था
कि वह मन्दिर निर्माण के लिए एक
ट्रस्ट का गठन करेगी। इसके लिए तीन
माह का समय भी निर्धारित किया गया था।
इसलिए नौ फरवरी से पहले ट्रस्ट का गठन
आवश्यक था।
ट्रस्ट में पांच संतों को स्थान मिला
है। इसके साथ ही श्रीराम जन्मभूमि
मामले को सर्वोच्च न्यायालय मे लड़न
वाले वरिष्ठतम अधिवक्ता पारासरन को भी
इसमें स्थान दिया गया है। अयोध्या के
राजवंश से संबंध रखने वाले
विश्वेन्द्र प्रताप मिश्र तथा
राष्ट्रीय स्वयंसवेक संग के अवध
प्रांत के कार्यवाह डा. अनिल मिश्र को
ट्रस्टी बनाया गया है। ट्रस्ट के दस
नाम घोषित कर दिये गए हैं। जबकि तीन
नाम केन्द्र और राज्य सरकार नामित
करेगी। ये सभी अधिकारी होंगे। केन्द्र
सरकार एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को
नामिल करेगी जोकि संयुक्त सचिव स्तर
का होगा तथा अनिवार्यरूप से हिन्दू
होगा। इसी तरह राज्य सरकार एक
आईएएस अधिकारी को नामित करेगी जोकि
सचिव स्तर का होगा तथा अनिवार्य रूप
से हिन्दू होगा। इसके अलावा अयोध्या
के जिलाधिकारी भी नामित सदस्य होंगे।
यदि अयोध्या का जिलाधिकारी किसी समय
गैरहिन्दू होगा तो ट्रस्ट में सदस्य
के रूप में कोई हिन्दू अपर जिलाधिकारी
रहेगा। ट्रस्ट में एक शंकराचार्य समेत
पांच संतों को स्थान प्रदान किया गया
है। निर्मोही अखाड़ा को ट्रस्ट में
स्थान दिया गया है।
ट्रस्ट का गठन इस प्रकार किया गया है-
1. के. पाराशरन ( सर्वोच्च न्यायालय
के वरिष्ट अधिवक्ता, पूर्व
प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी और राजीव
गांधी की सरकार में अटार्नी जनरल रहे।
पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित।
अयोध्या मामले की सर्वोच्च न्यायालय
में पैरवी की।
2. जगदंगुरु शंकराचार्य स्वामी
वासुदेवानन्द सरस्वती जी महाराज (प्रयागराज)
3. जगदगुरु माधवाचार्य स्वामी विश्व
प्रसन्नतीर्थ जी महाराज (कर्नाटक के
उडुपी स्थित पेजावर मठ के 33 वें
पीठाधीश्वर।
4. युगपुरुष परमानन्द जी महाराज (अखण्ड
आश्रम हरिद्वार के प्रमुख )
5. स्वामी गोविन्द देव गिरि जी महाराज
( महाराष्ट्र के प्रमुख आध्यात्मिक
संत)
6. विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र (
अयोध्या राजपरिवार के सदस्य)
7. डा. अनिल मिश्र ( राष्ट्रीय
स्वयंसेवक संघ के अवध प्रांत के
कार्यवाह)
8. श्री कामेश्वर चौपाल, पटना (दलित
सदस्य) इन्होंने शिलान्यास में पहली
ईंट रखी थी।
9. बोर्ड आफ ट्रस्टी सदस्य नामित
करेंगे।
10. बोर्ड आफ ट्रस्टी सदस्य नामित
करेगे।
11. महन्त दिनेन्द्र दास ( निर्मोही
अखाड़े के प्रतिनिधि)
12. केन्द्र सरकार द्वारा नामित
संयुक्त सचिव स्तर का हिन्दू आईएएस
अधिकारी
13. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नामित
सचिव स्तर का हिन्दू आईएएस अधिकारी
14. अयोध्या का जिलाधिकारी ( यदि
जिलाधिकारी गैरहिन्दू होगा तो हिन्दू
अपर जिलाधिकारी)
15. ट्रस्ट के सदस्य चेयरमैन का चयन
बोर्ड आफ ट्रस्टीजी करेगे।
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