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लखनऊ,
19 सितम्बर। (उप्रससे)। मुसलमानों, गरीब
सवर्णों को आरक्षण की मांग करने के बाद आज
मुख्यमंत्री मायावती ने प्रदेश के जाटों
को भी अन्य पिछडा वर्ग में शामिल करके
आरक्षण देने की मांग की है। उन्होंने
प्रधानमंत्री का ध्यान आकृष्ट करते हुए
उत्तर प्रदेश की जाट जातिसमुदाय को अन्य
पिछडे वर्गों की केन्द्रीय सूची में शामिल
करने का अनुरोध किया है।
इस संबंध में उन्होेंने प्रधानमंत्री डा0
मनमोहन सिंह को एक पत्र लिखकर अवगत कराया
है कि जाट जाति के व्यक्ति मुख्यत: कृषि
एवं कृषि सम्बन्धित अन्य कार्यों से
जीविकोपार्जन करते हैं। प्रत्येक परिवार
हेतु कृषि योग्य भूमि के कम हो जाने के
कारण उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है, इसके
अतिरिक्त जाट जाति के व्यक्ति शैक्षणिक
रूप से भी पिछडे हुए हैं। स्कूली शिक्षा
के क्षेत्र में भी इस जाति के बालकबालिकाएं
पिछडी हुईं है। इस समुदाय का प्रतिनिधित्व
केन्द्रीय सेवाओं में पर्याप्त नहीं है।
इसे दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा
10 मार्च, 2000 द्वारा प्रदेश के अन्य
पिछडे वर्गों की सूची में जाट जाति को
सम्मिलित किया गया है।
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री
कहा है कि अन्य पिछडे वर्ग की केन्द्रीय
सूची में राजस्थान राज्य की सूची में जाट
जाति को (धौलपुर एवं भरतपुर जिला को छोड़कर)
जारी अधिसूचना दिनांक 27 अक्टूबर, 1999
द्वारा सम्मिलित किया गया है। राजस्थान
राज्य उत्तर प्रदेश से सटा हुआ राज्य है
और राजस्थान राज्य के जाट जाति के
व्यक्तियों और उत्तर प्रदेश के जाट जाति
के व्यक्तियों की सामाजिक एवं शैक्षणिक
स्थिति लगभग एक जैसी ही है। इस आधार पर
उत्तर प्रदेश की जाट जाति को केन्द्र
सरकार की अन्य पिछडे वर्ग की सूची में
सम्मिलित किये जाने का पर्याप्त आधार है। |