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बरेली,
19 अक्टूबर I (उप्रससे)।
Bareilly, Oct
19, 2011. Uttar Pradesh Samachar Sewa बारह
साल पहले के उस भीषण हादसे को याद करके आज
भी रूह कांप जाती है। मीरगंज के पास बस
पेड़ से भिड़ने पर 11 होमगार्डो की मौत हो
गई थी। सभी लोकसभा चुनाव में ड्यूटी करके
श्रावस्ती से लौट रहे थे। उनके परिजन अब
भी मुआवजे के लिए ऐडि़यां रगड़ रहे हैं।
तब जबकि परिजनों ने तमाम वायदे किए गए थे
लेकिन आयोग ने अभी तक पैसा उपलब्ध नहीं
कराया है। वे अपनी फरियाद लेकर सदर तहसील
में आए थे।
उपजिला निर्वाचन अधिकारी राजेश कुमार राय
ने बताया की पुराना मामला है, दिखवाना
पड़ेगा, कितना मुआवजा मिलना था और क्यों
नहीं मिल पाया है।
देवबंद के सुरेन्द्र, अमरीक, उमा, वीर
सिंह, राकेश ने बताया कि हादसे के बाद
आयोग से 5-5 लाख रुपये मिलने की बात थी।
हमारा यह इंतजार अभी तक खत्म नहीं हो रहा
है। जब कभी फरियाद लेकर आते हैं, कह दिया
जाता है, अभी पैसा नहीं आया है। हां,
परिवहन विभाग ने 20-20 हजार रुपये जरूर
उपलब्ध करा दिए। होमगार्डो के परिजनों को
आयोग के मुआवजा नहीं देने से आर्थिक
कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। किसी की
पत्नी तो किसी के मां-बाप हादसे को याद
करके अभी तक सिसक रहे हैं। मरने वालों में
कई तो घर के अकेले कमाऊ पूत थे। तहसील
दिवस आए सुरेन्द्र कुमार का कहना था, सब
जगह फरियाद कर चुके। मुख्यमंत्री को भी
ज्ञापन भेजा था लेकिन सुनवाई नहीं हुई। 12
साल से भागदौड़ कर रहे हैं, अच्छा खासा
पैसा ट्रेन और बस के किराये में खर्च हो
गया। अभी कितने और चक्कर लगाने पड़ेंगे,
समझ में नहीं आ रहा है। बता दें कि मीरगंज
के पास दुघर्टना में मरने वाले होमगार्ड
ड्यूटी करके सहारनपुर लौट रहे थे। उनमें
ज्यादातर देवबंद के रहने वाले थे। |