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नई
दिल्ली, 25 फरवरी। (उप्रससे)।
New Delhi ,
Feb. 25 , 2012. (UPSS).
अगर सोनिया गांधी यह बता दें कि वह कितना
इनकम टैक्स देती हैं, तो क्या इससे उसकी
जान को खतरा हो सकता है? जी हां, सोनिया
गांधी का कुछ ऐसा ही कहना है। सूचना के
अधिकार के तहत जब एक आरटीआई कार्यकर्ता ने
सोनिया गांधी के इनकम टैक्स रिटर्न के बारे
में जानना चाहा तो, उन्होंने निजी आजादी
और सुरक्षा का हवाला देते हुए ब्योरा देने
से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस
सूचना का जनहित से कुछ लेना-देना नहीं
है।
आरटीआई कार्यकर्ता वी. गोपालकृष्णन ने
फाइनैंशल इयर 2000-2001 और 2010-2011 के
बीच सोनिया गांधी के इनकम टैक्स रिटर्न का
ब्योरा मांगा था। इसके बाद नई दिल्ली के
अस्टिटेंट इनकम टैक्स ऑफिसर ने (जो कि चीफ
पब्लिक इन्फर्मेशन ऑफिसर भी हैं) 23 जनवरी
को आरटीआई ऐक्ट-2005 के सेक्शन-11 के तहत
इसके बारे में सोनिया गांधी को लिखा। इसके
जवाब में सोनिया ने लिखा कि किसी तीसरे
व्यक्ति को इस तरह की सूचना मुहैया कराने
से उनकी प्रिवेसी का तो उल्लंघन होगा ही,
उनकी सुरक्षा को भी खतरे पैदा हो सकते
हैं। उन्होंने लिखा कि यह सूचना इनकम
टैक्स डिपार्टमेंट को निजी और गुप्त तौर
पर सौंपी जाती है। इनकम टैक्स ऐक्ट, 1961
की धारा 138 के तहत यह सूचना किसी तीसरे
पक्ष को नहीं मुहैया करानी चाहिए।
गोपालकृष्णन की यह मांग दूसरी बार खारिज
की गई है। इसके पहले चीफ इन्फर्मेशन ऑफिसर
ने बिना सोनिया गांधी से पूछे इसे खारिज
कर दिया था। दूसरी बार अपीलीय प्राधाकिरण
के हस्तक्षेप के बाद चीफ इन्फर्मेशन ऑफिसर
ने सोनिया गांधी से इस बारे में पूछा।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सोनिया गांधी
की चिट्ठी के बाद गोपालकृष्णन को दूसरी
बार सूचना देने से मना कर दिया है।
असली कारण तो यह है कि इटेलियन सोनिया
गांधी नही चाहती कि किसी को भी उनकी काली
कमाई या विदेशों में रखे उनके कालेधन के
बारे में पता चले इसलिए वह सबकुछ छिपाकर
रखना चाहती है इसलिए ना ही उसने अपने इनकम
टैक्स रिटर्न का ब्योरा सूचना के अधिकार (RTI)
के तहत दिया और ना विदेशों में जमा कालेधन
धन को वापिस लाने की कोई पहल की बल्कि जो
कालेधन को भारत में वापिस लाने की बात करता
है उस पर रामलीला मैदान में लाठियां चलवा
दी जाती है या
उसे झूठे केसों में फंसा दिया जाता है और
इस काम में सीबीआई और बाकी सरकारी
एजेन्सियां का खुलकर उपयोग किया जाता है
बल्कि अब तो कांग्रेस ने न्यायालयों को
भी नहीं छोडा है निचली अदालतों को तो पहले
अपनी पकड में रखा हुआ है परन्तु अब हाई
कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के रामलीला मैदान
में हुई 4 जून की घटना पर अभी के आए
निर्णय को देखकर भी यही लगता है कि यहां
भी उन्होंने सेंध लगा दी है अब चाहे इसके
लिए उन्हें साम, दाम, दण्ड, भेद की नीति
ही क्यों ना अपनानी पडी हो।
और अब जरा बात की जाए इस देश की बिकाउ और
भांड मीडिया की तो वह कभी भी इस तरह के
मामले नही उठाएगी कि आखिर क्यों सोनिया
गांधी ने सूचना
के अधिकार (RTI) के तहत अपने इनकम टैक्स
का ब्यौरा देने से मना कर दिया वह
क्यों नहीं अपने इनकम टैक्स का ब्यौरा
सार्वजनिक करती पर वो कहते है ना "चोर की
दाढी में तिनका" और यहां तो सोनिया गांधी
समेत पूरी कांग्रेस पार्टी और इस बिकाउ और
भांड मीडिया की दाढी मे तिनका है।
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