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नई
दिल्ली, 06 दिसम्बर
2019 ।
(उप्रससे)।
अयोध्या मामले में नौ नवम्बर को आये
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ
मुस्लिम पक्ष ने शुक्वार को आठ और
पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की हैं। ये
याचिकाएं मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की
पहल पर दाखिल की गई हैं।
इनमें मौलाना मुफ्ती हबीबउल्लाह, मौ
उमर, मौलाना महफूजुर्रहमान,
मिस्वाहउद्दीन, रिजवान, हाजी
महबूब,असद व अयूब की ओर से दाखिल की
गई हैं। याचिकाओं में कहा गया है कि
फैसले में मूर्ति को न्यायिक व्यक्ति
मानना गलत है।
दो दिसम्बर को जमीअत ने दाखिल की थी
याचिका
इसके पहले जमीअत उलेमा ए हिन्द की पहल
पर दो दिसम्बर को पुनर्विचार याचिका
दाखिल की जा चुकी है। यह याचिका मूल
वादी एम सिद्दीक के कानूनी
उत्तराधिकारी और जमीअत उलेमा ए हिन्द
के यूपी अध्यक्ष मौलाना सईद असद रसीदी
ने दाखिल की है।
नौ नवम्बर के आदेश को चुनौती
मुस्लिम पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय के
नौ नवम्बर के उस आदेश को चुनौती दी
है। जिसमें अयोध्या मामले का निपटारा
करते हुए रामलला विराजमान के पक्ष में
फैसला सुनाया गया था। मुस्लिम पक्ष को
पांच एकड़ जमीन अलग से देने का आदेश
दिया गया था। इस फैसले को अधिकांश
मुसलमानों ने मान लिया। मूल पक्षकार
यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी कहा कि
हमें फैसला स्वीकार है और हम
पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करेंगे।
किन्तु मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड और
जमीअत उलेमा एक हिन्द ने इसे स्वीकार
नहीं किया।
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