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उत्तराखण्डः कांग्रेस बागियों के लिए भाजपा का सरेन्डर
सीमान्त प्रदेश में लड़ाई अब कांग्रेस और बागी कांग्रेस के बीच सिमटी
भाजपा में बागी कांग्रेसियों के विलय पर भूपत सिंह बिष्ट का विश्लेषण
Publised on : 19 May 2016,  Last updated Time 23:59
देहरादून । (उ.प्र.समाचार सेवा)। उत्तराखंड भाजपा ने 18 मार्च 2016 को कांग्रेस में बगावत करा के अनैतिक तालमेल और मूल्यहीन राजनीति की बदौलत सत्ता हथियाने का जो सपना बुना था वो पूरा तो नही हुआ लेकिन उसका दुष्प्रभाव अब पार्टी में ज़हर की तरह फैलने लगा है।

कांग्रेस के बागी बने भाजपा के हीरो, केन्द्रीय मुख्यालय में हुई वापसी

कांग्रेस के दागी - बागी भाजपा के लिए अपरिहार्य हीरो बन गए और भाजपा ने इन्हें पार्टी में शामिल करके अपने इतिहास में एक काला अध्याय जोड़ लिया है। भाजपा अपने नायकों के स्थापित मूल्यों से परे हटकर सत्ता के लिए हर कीमत पर समझौता करने वाली पार्टी बन गई है।
बागी कांग्रेसियों के भरोसे सत्ता पाने का प्रयास असम और अरुणाचल प्रदेश के बाद उत्तराखंड में भी सफल होगा - इस कयास पर जल्दी ही स्थिति साफ हो जायेगी। वैसे आज तो भाजपा बागी कांग्रेस के भरोसे ही हरीश रावत से लोहा लेना चाहती है। कुछ का मानना है - हरीश रावत और हरक सिंह रावत के झगड़े में भाजपा अब कांग्रेस की बी टीम बन गई है। अन्यथा दस बागी कांग्रेस विधायकों को पार्टी में लेकर कांग्रेस मुक्त भारत का दावा खोखला लगने लगा है।

भाजपा ने अपने पूर्व मुख्यमंत्रियों की नही सुनी, हरक सिंह को गले लगाया !

18 मई को दिल्ली में उत्तराखंड भाजपा कोर कमेटी की बैठक में कांग्रेसी बागियों के स्वागत के लिए सर्वानुमति बनाने का प्रयास हाईकमान ने किया। इस बैठक में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों ने कांग्रेस के दागी - बागियों के लिए भाजपा हाईकमान की आतुरता पर कड़ी आपत्ति जाहिर की गई। सूत्रों के अनुसार इन बागियों के आया राम - गया राम होने के किस्से और आम मतदाताओं के मन में इस राजनीतिक भ्रष्टाचार को आने वाले चुनाव में हज़म ना कर पाने के तर्क और सिद्धांत उत्तराखंड प्रभारी ने दरकिनार कर दिए।
प्रदेश भाजपा के बड़े नेताओं ने मनमसोस कर कांग्रेस बागियों के स्वागत समारोह से दूरी बना के रखी। वहीं दूसरे खेमे ने कांग्रेस के इन बागियों का स्वागत करने में बढ़ चढ़कर भाग लिया। कुछ माह के लिए मुख्यमंत्री रहे भगत सिंह कोशियारी ही बागियों का स्वागत करते दिखे जबकि दोनों पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और सेवा नि0 जनरल भुवन चंद्र खण्डूडी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत इस स्वागत समारोह से नदारद रहे।

हरक सिंह रावत का पार्टी प्रवेश आत्मघाती

गढ़वाल भाजपा के नेताओं ने हरक सिंह रावत के पार्टी प्रवेश को आत्मघाती बताया और एक मुख्यमंत्री ने इन नेताओं के साथ भाजपा को गर्त में ले जाने पर खुली चिंता जाहिर कर दी। गढ़वाल के बड़े नेता और सांसद ने इन बागियों को अगले चुनाव तक बाहर से सहयोग देने की रणनीतिक पेशकस भी रखी ताकि भाजपा को आम लोगों के कोप से बचाया जा सके।
गढ़वाल संगठन पर गहरी पैठ रखने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री ने कोर कमेटी की बैठक में बागियों के आगे भाजपा की किसी भी मजबूरी को मतदाताओं को पसंद ना आने वाले विषय बताया । दो घंटे चली इस बैठक में जब सहमति बनते नही दिखी तो हाईकमान पर फैसला छोड़ दिया गया और रात 8 बजे के बाद आनन - फानन में हरक सिंह और बागियों को भाजपा में पांच रुपये की रशीद देकर सदस्य बनाया गया। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आये सतपाल महाराज भी बागियों का स्वागत कर रहे थे।
 

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News source: UP Samachar Sewa

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