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  News  
 
Cabinet: कृषि भूमि को औद्योगिक भूमि में बदलने का शुल्क 15 प्रतिशत घटाया गया
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:-
Tags:Lucknow
Publised on : 2020:10:30      Time 20:21    Last  Update on  : 2020:10:30      Time 20:21

लखनऊ, 30 अक्टूबर 2020 ( उ.प्र.समाचार सेवा)।
जनपद मीरजापुर में विन्ध्यवासिनी मन्दिर (काॅरीडोर) परिक्रमा मार्ग
हेतु परियोजना के क्रियान्वयन का प्रस्ताव स्वीकृत


मंत्रिपरिषद ने जनपद मीरजापुर में विन्ध्यवासिनी मन्दिर (काॅरीडोर) परिक्रमा मार्ग बनाये जाने हेतु परियोजना के क्रियान्वयन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। मंत्रिपरिषद द्वारा परियोजना की अग्रेत्तर कार्यवाही हेतु निर्णय लिए जाने के लिए मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
जनपद मीरजापुर स्थित आदि शक्ति माँ विन्ध्यवासिनी देवी मन्दिर एक अत्यन्त प्रसिद्ध श्रद्धा/आस्था का केन्द्र है। विन्ध्याचल स्थित मुख्य मन्दिर माँ विन्ध्यवासिनी धाम के चारों तरफ परम्परागत तौर पर श्रद्धालुओं द्वारा परिक्रमा की जाती है परन्तु मन्दिर परिसर में परिक्रमा मार्ग सीमित एवं संकरा होने के कारण दुर्घटना की सम्भावना बनी रहती है। विन्ध्यवासिनी मन्दिर (काॅरीडोर) परिक्रमा मार्ग बन जाने से पर्यटक सुविधाओं में वृद्धि होगी तथा दुर्घटना की सम्भावना कम की जा सकेगी। विन्ध्यवासिनी मन्दिर काॅरीडोर बनाए जाने हेतु विन्ध्यवासिनी मन्दिर के आस-पास चारों ओर 50 फीट चैड़ाई वाला परिक्रमा पथ बनाया जाएगा।
विन्ध्यधाम गंगा नदी के तट पर स्थित है जहां प्रधानमंत्री जी की महत्वाकांक्षी योजना अर्थ गंगा के अन्तर्गत जलक्रीड़ा एवं साहसिक पर्यटन की अपार सम्भावनाएं विद्यमान हैं। इसके साथ ही साथ विन्ध्याचल के समीप अनेक जल प्रपात यथा विन्डम फाॅल, कुशेरा फाॅल, टाडा फाॅल आदि भी स्थित हंै, जहां पर ईको टूरिज्म की अत्यधिक सम्भावनाएं विद्यमान हैं। विन्ध्यधाम में पर्यटन सुविधाओं के विकास से यहां पर विभिन्न श्रेणी के पर्यटकों का आवागमन बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के साथ-साथ पूंजी निवेश में भी वृद्धि होगी।
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जल जीवन मिशन के अन्तर्गत प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र, विन्ध्य क्षेत्र तथा
गुणता प्रभावित ग्रामों में पेयजल योजना के क्रियान्वयन के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने जल जीवन मिशन के अन्तर्गत प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र, विन्ध्य क्षेत्र तथा गुणता प्रभावित ग्रामों में पेयजल योजना के क्रियान्वयन के सम्बन्ध में प्रस्तुत प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
बुन्देलखण्ड/विन्ध्य क्षेत्र विभिन्न जनपदों के ग्रामों में पेयजल आपूर्ति हेतु परियोजना के निर्माण के निमित्त कार्यदायी फर्माें के माध्यम से आगणनों का विरचन कराया गया। विरचित आगणनों की परियोजनाओं में से 200 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 21 परियोजनाओं पर मंत्रिपरिषद का अनुमोदन पूर्व में प्राप्त किया जा चुका है, जिनमें अग्रेतर कार्यवाही गतिमान हैं।
सम्प्रति व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित 200 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 03 अन्य परियोजनाओं को मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन प्राप्त किया गया है। यह परियोजनाएं जनपद जालौन के विकासखण्ड कोंच एवं डकोर स्थित सला ग्राम समूह पाइप पेयजल योजना (व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत 53479.40 लाख रुपये), जनपद सोनभद्र के विकासखण्ड घोरावल एवं राबर्ट्सगंज स्थित पटवध तथा पटवध-2 ग्राम समूह पाइप पेयजल योजना (व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत 86835.57 लाख रुपये) तथा जनपद सोनभद्र के विकासखण्ड चोपन स्थित कदरा, नेवारी एवं हर्रा ग्राम समूह पाइप पेयजल योजना (व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत 23198.95 लाख रुपये) है। इन पाइप पेयजल योजनाओं से क्रमशः 225, 661 तथा 67 राजस्व ग्राम आच्छादित होंगे।
जल जीवन मिशन के अन्तर्गत प्रथमतः बुन्देलखण्ड और विन्ध्य क्षेत्र की समस्त आबादी तथा आर्सेनिक/फ्लोराइड एवं जापानी इंसेफ्लाइटिस (जे0ई0)/एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिण्ड्रोम (ए0ई0एस0) से ग्रस्त समस्त आबादी को चरणबद्ध रूप से शुद्ध पाइप पेयजल परियोजना से आच्छादित किया जा रहा है।
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विश्व बैंक सहायतित उ0प्र0 प्रो-पुअर पर्यटन विकास परियोजना
के सुचारू संचालन एवं क्रियान्वयन हेतु प्रस्तुत प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने विश्व बैंक सहायतित उ0प्र0 प्रो-पुअर पर्यटन विकास परियोजना के सुचारू संचालन एवं क्रियान्वयन हेतु प्रस्तुत प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। मंत्रिपरिषद द्वारा परियोजना में अग्रेतर संशोधन हेतु मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
उ0प्र0 प्रो-पुअर पर्यटन विकास परियोजना कुल 57.14 मिलियन यू0एस0 डाॅलर (371.43 करोड़ रुपये) से संचालित की जाएगी, जिसमें 70 प्रतिशत विश्व बैंक द्वारा एवं 30 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
आगरा एवं मथुरा के कार्याें (कुल 167 करोड़ रुपये) के स्थान पर सारनाथ एवं कुशीनगर में नये कार्याें को कराया जाएगा। सारनाथ के कार्याें को वाराणसी विकास प्राधिकरण के द्वारा तथा कुशीनगर के कार्यांे को गोरखपुर विकास प्राधिकरण के द्वारा कराये जाने हेतु उन्हें कार्यदायी संस्था नामित/अधिकृत किया गया है।
परियोजना के क्रियान्वयन से प्रस्तावित कार्य स्थलों पर पर्यटक सुविधाओं का विकास होगा तथा पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा एवं रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही, स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और स्थानीय विकास भी होगा।
पर्यटन विकास के माध्यम से उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर स्थानीय रोजगार में वृद्धि करके स्थानीय लोगों के आर्थिक उन्नयन में सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा विश्व बैंक की सहायता से उ0प्र0 प्रो-पुअर पर्यटन विकास परियोजना संचालित की जा रही है।
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कृषि भू-उपयोग की भूमि को औद्योगिक भू-उपयोग में परिवर्तन हेतु
शुल्क की दर को 35 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत किये जाने का निर्णय


मंत्रिपरिषद ने कृषि भू-उपयोग की भूमि को औद्योगिक भू-उपयोग में परिवर्तन हेतु शुल्क की दर को 35 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत किये जाने का निर्णय लिया है। इसके लिए उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) नियमावली-2014 में संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गयी है।
यह निर्णय आदेश निर्गत होने के उपरान्त तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा। भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में कमी होेने से उद्यमी औद्योगिक विकास हेतु प्रोत्साहित होंगे। औद्योगिक समूह प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए आकर्षित होंगे। परिणाम स्वरूप में प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से सम्बन्धित क्षेत्र में राजगोर के अवसरों में भी वृद्धि होगी।
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कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, भारत एवं कृषि,
वन एवं मत्स्य मंत्रालय, टोक्यो, जापान के मध्य एम0ओ0सी0 हस्ताक्षरित किये जाने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, भारत एवं कृषि, वन एवं मत्स्य मंत्रालय, टोक्यो, जापान के मध्य मेमोरेण्डम आॅफ कोआॅपरेशन (एम0ओ0सी0) हस्ताक्षरित किये जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। मंत्रिपरिषद के अनुमोदन के पश्चात विदेश मंत्रालय, भारत सरकार से राजनीतिक अनुमति प्राप्त होने के उपरान्त ही प्रश्नगत एम0ओ0सी0 का सम्पादन कराया जाएगा। मंत्रिपरिषद ने अपरिहार्य परिस्थितियों में प्रश्नगत एम0ओ0सी0 में किसी संशोधन की आवश्यकता होेने पर इसके लिए मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया है।
कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, भारत एवं कृषि, वन एवं मत्स्य मंत्रालय, टोक्यो, जापान के मध्य एम0ओ0सी0 हस्ताक्षर किये जाने से कृषि प्रधान उत्तर प्रदेश की दो तिहाई जनसंख्या जो कृषि पर आधारित है, की आय बढ़ाने में सहयोगी सिद्ध होगा।
कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालयों में कृषि संबंधी क्षेत्रों में रिसर्च, एजुकेशन एवं एक्सटेंशन के क्षेत्र में एक्सीलेंस प्राप्त किये जाने तथा उत्तर प्रदेश में जापान द्वारा कृषि के क्षेत्र में शोध एवं तकनीकी सहयोग प्रदान किये जाने से कृषि क्षेत्र में लक्षित कृषकों की आय बढ़ाने के सरकार के प्रयासों को बल मिलेगा।
सम्पादित की जा रही एम0ओ0सी0 से प्रदेश के कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों एवं प्रौद्योगिकविदों तथा साहित्य सूचना और कार्यप्रणाली एवं सामान्य हित के कार्यक्रम में आपसी सहमति से उपलब्ध वैज्ञानिक उपकरणों के आदान-प्रदान से कृषि सम्बन्धी शोध कार्याें को बढ़ावा मिलेगा। जिससे नवीन कृषि तकनीकों के विकास में सहयोग प्राप्त होगा।
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श्री शुकदेव आश्रम स्वामी कल्याण देव सेवा ट्रस्ट, शुक्रताल, मुजफ्फरनगर को लीज पर दी गयी
05 एकड़ (2.0243 हे0) वन भूमि के आगामी 30 वर्षाें हेतु (दिनांक 01.01.2010 से
दिनांक 31.12.2039 तक) लीज नवीनीकरण की अनुमति के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने श्री शुकदेव आश्रम स्वामी कल्याण देव सेवा ट्रस्ट, शुक्रताल, मुजफ्फरनगर को लीज पर दी गयी 05 एकड़ (2.0243 हे0) वन भूमि के आगामी 30 वर्षाें हेतु (दिनांक 01.01.2010 से दिनांक 31.12.2039 तक) लीज नवीनीकरण की अनुमति विषयक प्रस्ताव राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड की स्थायी समिति के विचारार्थ/अनुमोदनार्थ भारत सरकार को प्रेषित किये जाने के प्रस्ताव को अनुमति प्रदान कर दी है।
जनपद मुजफ्फरनगर में शुक्रताल एक धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व का ग्राम हैं। इसी स्थान पर स्थित शुकदेव आश्रम (जनपद मुजफ्फरनगर में श्री शुकदेव आश्रम स्वामी कल्याण देव सेवा ट्रस्ट) में लगातार भागवत कथाएं होती रहती हैं, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं एवं रात्रि स्थगन करते हैं। ट्रस्ट द्वारा निःशुल्क विद्यालय, छात्रावास एवं निःशुल्क चिकित्सालय भी स्थापित एवं संचालित है। इस संस्था को बागवानी, वृक्षारोपण एवं गौ गृह निर्माण हेतु ग्राम-शुकताल बांगर स्थित 05 एकड़ (2.0243 हे0) वन भूमि दिनांक 01.01.1950 से 31.12.1979 तक 30 वर्षाें के लिए इस शर्त पर दी गयी कि उतनी ही अवधि के लिए पट्टे कर 02 बार नवीनीकरण किया जाएगा।
प्रश्नगत संस्था को लीज पर दी गयी 05 एकड़ भूमि के द्वितीय लीज नवीनीकरण (दिनांक 01.01.1980 से दिनांक 31.12.2009) हेतु उ0प्र0 शासन द्वारा संस्तुति पत्र सं0-5791/14-2-93-187/1953 दिनांक 01.10.1993 भारत सरकार को भेजा गया, जिस पर अन्तिम निर्णय भारत सरकार से प्राप्त नहीं हुआ है।
भारत सरकार को प्रेषित इस प्रस्ताव में प्रश्नगत 05 एकड़ वन भूमि संरक्षित क्षेत्र (हस्तिनापुर वन्य जीव विहार) में थी। संरक्षित क्षेत्र के अन्तर्गत अवस्थित इस वन भूमि के लीज नवीनीकरण हेतु वन (संरक्षण) अधिनियम-1980 के तहत स्वीकृति के अतिरिक्त राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड से अनुमोदन प्राप्त करने की व्यवस्था तत्समय लागू नहीं हुई थी। यह व्यवस्था भारत सरकार के दिशा-निर्देश संख्या-थ्ण्छव.6.3ध्2003ॅस्.1;च्ज्द्ध दिनांक 11.01.2005 द्वारा वर्ष 2005 से लागू हुई। अतः अब संरक्षित क्षेत्र (हस्तिनापुर वन्य जीव विहार) के अन्तर्गत अवस्थित वर्णित 05 एकड़ वन भूमि के लीज का नवीनीकरण (दिनांक 01.01.2010 से दिनांक 31.12.2039 तक) राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड की स्थायी समिति के अनुमोदनोपरान्त होगा।
 

 
 
   
 
 
                               
 
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