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किसानों की ट्रैक्टर परेड से दिल्ली अशांत, घुसे उपद्रवी
  1. - लाल किले पर सिखों ने फहराया केसरिया
    - ट्रैक्टर पलटने से किसान की मौत
    - तीनों वार्डर पर वैरिकेडिंग तोड़ कर किसान दिल्ली में घुसे
    - सिख निहंगों ने लहराईं तलवारें, घोड़े दौड़ाई
    - पुलिस पर किसानों की हमला, पुलिस ने किया लाठी चार्ज

Tags: #U.P Samachar Sewa , #Kisan Tractor Parede, #Kisan Andolan, #Delhi Police, Red Fort
Publised on : 2021:01:26      Time 18:18  

नई दिल्ली, 26 जनवरी। ( उ.प्र.समाचार सेवा )। गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड से दिल्ली अशांत हो गई। दिल्ली पुलिस किसानों को परेड की सशर्त अनुमति देने के बाद उसे नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने में विफल साबित हुई। निर्धारित रास्तों को छोड़कर दिल्ली में घुसे किसानों ने जमकर उत्पात किया। पुलिस पर पथराव, वैरिकेडिंग तोड़ने और अंधाधुंध ट्रैक्टर चलाने के साथ ही निहंगों ने घोड़े दौड़ाए, पुलिस पर तालवारों से प्रहार करने की भी कोशिश की। इसी बीच ट्रैक्टर दौड़ा रहे एक किसान की मौत हो गई। सिख किसानों के एक गुट ने लालकिला पहुंच कर उस पर धार्मिक ध्वज फहरा दिया। इस ध्वज को एक पोल पर तिरंगे के बगल में ही फहराया गया। उधर किसान नेता राकेश टिकैत ने लालकिला पर झंडा फहराने को गलत बताते हुए कहा है कि यह काम हमारे लोगों ने नहीं किया। उन्होंने बताया कि आंदोलन में घुसे कुछ राजनैतिक लोगों ने उत्पात किया और परेड को रास्ते से भटकाया है।
तोड़ा समझौता, वैरिकेडिंग तोड़ प्रतिबंधित रास्तों पर पहुचे
दिल्ली में आज परंपरागत गणतंत्र दिवस की परेड आयोजित थी। किसान संगठनों को भी दिल्ली पुलिस ने सशर्त दिल्ली में तीन बार्डर पर कुछ दूरी तक ट्रैक्टर परेड करने की अनुमति दी थी। इस पर किसान समन्वय समिति ने सहमति दी थी कि वे निर्धारित रास्तों और समय पर परेड शुरु करेंगे। यह तय हुआ था कि किसान अपनी परेड दिल्ली में राजपथ की परेड पूरी होने के बाद 12 बजे शुरु करेंगे। लेकिन, किसान आंदोलन में घुसे कुछ अतिवादी पंजाब के सिख किसानों ने नियम और शर्तों के तहत मिली अनुमति की धज्जियां उड़ाते हुए सुबह आठ बजे परेड शुरु कर दी। भारी संख्या में ट्रैक्टरों को लेकर किसान सबसे पहले टीकरी बार्डर से घुसने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने वैरिकेडिंग लगाई हुई थी। इसे किसानों ने अपने ट्रैक्टरों से हटा दिया और दिल्ली के भीतर घुस गए। इसके बाद सिघु बार्डर पर भी नौ बजे के आस पास किसानों ने वैरिकेडिंग तोड़ दी।
पुलिस के सामने निहंगों ने लहराईं तलवारें, घोड़े दौड़ाए
गाजीपुर वार्डर से किसान ग्यारह बजे के आसपास दिल्ली में घुसे लेकिन ये किसान पर निर्धारित रास्त पर नहीं गए और इन्होंने आईटी का रास्ता पकड़ लिया। सैकड़ों किसान ट्रैक्टर लेकर आईटीओ पर पहुंच गए। यहां से लाल किला और इण्डिया गेट जाने की कोशिश करने लगे। आईटीओ पर दिल्ली पुलिस मुख्यालय के सामने ही किसानों को पुलिस ने रोक लिया। लेकिन, यहां उन्होंने वैरिकेडिंग तोड़ दी, इस पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और आंसु गैस के गोले छोड़े। किसानों ने यहां से ट्रैक्टर दौड़ा दिये और पुलिस वालों पर चढ़ाने की कोशिश की। आईटीओ पर कई सिख निंहंगों ने नंगी तलवारें लहराईं। एक सिपाही पर हमला करने की भी कोशिश की। पुलिस पर पथराव भी किया गया।
लाल किला पर फहराया धार्मिक झंडा
किसानों ने दिल्ली पुलिस द्वारा लगाई गईं डीटीसी की बसों में तोड़फोड़ की। लेकिन, पुलिस इ्न्हें रोकने में नाकाम साबित हुई, कुछ किसान ट्रैक्टर लेकर लालकिला पहुंच गए। वहां सिख किसानों के एक और गुट ने जो पहले से ही दिल्ली में दाखिल हो चुका था, लाल किला पर कब्जा कर लिया। इन्होंने लाल किला पर चढ़कर अपने झंडे लहराये और बाद में एक सिख ने ध्वज पोल पर चढ़कर धार्मिक केसरिया झंडा लहरा दिया।
स्टंट कर रहे ट्रैक्टर चालक किसान की मौत
इसी दौरान आईटीओ पर एक किसान ने ट्रैक्टर से स्टंट करना शुरु कर दिया। इसी स्टंट में ट्रैक्टर पलट गया और किसान की मौके पर ही मौत हो गई। इस किसान की मौत को भी कुछ किसानों और मीडिया के एक वर्ग ने गलत ढंग से प्रचारित करने की कोशिश की। कुछ लोगों ने अफवाह फैलाई कि किसान की मौत पुलिस की गोली से हुई है।
उधर टिकरी बार्डर से घुसे किसानों ने आटर रिंग रोड पर पहुंचने के बाद वहां उपद्रव किया। किसानों ने संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर में भारी उपद्रव किया। यहां भी किसानों की पुलिस के साथ तीखी झड़पें हुईं।
कांग्रेस की भूमिका पर सवाल
दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर हुई अराजकता और उपद्रव के लिए कांग्रेस भी कम जिम्मेदार नहीं है। कांग्रेस ने किसानों को लगातार भड़काने का काम किया है। उसने किसानों को समझौते तक पहुंचने से रोकने के हर संभव प्रयास किया। इसका परिणाम यह हुआ कि किसान अड़े रहे और गणतंत्र दिवस पर परेड के नाम पर दिल्ली में तांडव करने में सफल हुए। दिल्ली के उपद्रव के लिए अब कांग्रेस की भूमिका पर भी सवाल उठेंगे।
राष्ट्रीय पर्व पर देश की छवि खऱाब की
गणतंत्र दिवस पर ही ट्रैक्टर परेड करने पर अड़े किसान संगठनों को दिल्ली पुलिस ने एक दिन पहले अनुमति दे दी थी। लेकिन, इनके साथ समझौता हुआ था कि किसान आउटर रिंग रोड पर नहीं जाएंगे। बल्कि तीनों बार्डर के इलाकों में ही भ्रमण करके अपने धरना स्थलों पर लौट आएंगे। इसके साथ ही समय भी निर्धारित हुआ कि दिल्ली की राजपथ परेड समाप्त होने के बाद ही किसानों की परेड शुरु होगी। लेकिन, किसानों ने इन सभी शर्तों का उल्लंघन किया। किसानों ने दिल्ली में लालकिला पर राष्ट्रीय ध्वज के बगल में ही अपना भी धार्मिक झंडा लहरा दिया। इस घटना को पडो़सी शुत्र पाकिसान ने प्रचारित किया। पाकिस्तान के ट्वीटर हैंडल से कहा गया कि आन्दोलनकारियों ने भारत के राष्ट्रीय ध्वज को हटाकर खालिस्तान की झंडा लहरा दिया है।
नियम शर्तों के उल्लंघन और उपद्रव पर हो नेताओं पर कार्रवाई
पुलिस के साथ समझौता करके नियमों और शर्तों का उल्लंघन और दिल्ली में उपद्रव के लिए किसान संगठनों के उन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने समझौते पर सहमति दी थी।

 
 
   
 
 
 
                               
 
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