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किसानों को समस्याओँ को लेकर फिक्रमंद हुए जिम्मेदार, जांच को पहुंचे धान क्रय केन्द्र
Tags: U.P Samachar Sewa 
Publised on : 2020:12:30      Time 21:45  

साइड इफेक्टः किसानों को लेकर यकायक फिक्रमंद हुए जिम्मेदार
धान खरीद केंद्र पर किसानों को परेशान किये जाने की शिकायत
सदस्य भारतीय खाद्यान निगम राज्य सलाहाकर ने किया निरीक्षण
डीएम से की शिकायत, डीएम ने सौंपी एसडीएम सदर को जांच
एजेंसीयों की मनमानी पर मुख्यमंत्री को लिखा तत्काल कार्यवाही के लिए पत्र

Paddy Curchageमथुरा , 30 दिसंबर 2020 ( उ.प्र.समाचार सेवा) ।  किसान आंदोलन का असर दिखने लगा है। मंत्री से संतरी तक किसानों को लेकर फिक्रमंद हो चले हैं। लम्बे समय से धान खरीद केंद्रों पर किसाना परेशानी से जूझ रहे है। अब यकायक यह परेशानियां जिम्मेदारों को समझ आने लगी हैं।
भारतीय खाद्य निगम के राज्य सलाहकार सदस्य अनूप सारस्वत द्वारा विगत दिवस मथुरा जनपद के धान खरीद केंद्र जिनका संचालन आरएफसी, एफसीआई एवं एसएमआई द्वारा किया जा रहा है का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान मिली अनियमितताओं पर अनूप सारस्वत द्वारा तत्काल जिलाधिकारी से मुलाकात कर वास्तविकता से अवगत कराया गया। जिसपर जिलाधिकारी ने तुरंत संज्ञान लेते हुए उप-जिलाधिकारी सदर क्रांतिशेखर को जांच सौंपी गई है। इसी संदर्भ में अनूप सारस्वत द्वारा सूबे के मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखकर धान खरीद केन्द्रों पर चल रहे फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार की त्वरित जांच कराने हेतु पत्र लिखा है। पत्र के अनुसार धान खरीद केंद्रों पर नोडल अधिकारी डेप्युटी एआरएम राजेश्वर प्रताप सिंह के होनहार केंद्र प्रभारियों द्वारा किसानों को हफ्तों चक्कर काटने पर विवश किया जा रहा है। इनके इन कृत्यों से परेशान होकर किसान को मजबूरन अपनी फसल बिचैलियों के माध्यम से बेचनी पड़ रही है। लैब टेस्टिंग और क्वालिटी के नाम पर किसानों से अवैध वसूली एवं उनका मानसिक शोषण भी मौके पर होता पाया गया। शासन से प्राप्त धान खरीद के लक्ष्य को भी असमान रूप से आवंटित किया गया है जिसकी वजह से किसानों को भिन्न-भिन्न केंद्रों पर भटकना पड़ रहा है। किसानों को उठने बैठने की भी कोई समुचित व्यवस्था मौके पर नहीं मिली। किसानों से आरएफसी, एसएमआई एवं एफसीआई कर्मचारियों का व्यवहार भी अत्यधिक यातनादायक प्रतीत हुआ। तीनो एजेंसियों का लोडिंग अनलोडिंग एवं लेबर उपलब्ध कराने का टेंडर एक ही ठेकेदार को दिया हुआ है जिसका भुगतान कागजों पर ही दर्शाया जा रहा है। जबकि उक्त ठेकेदार द्वारा खरीद केंद्र पर कोई वाहन सुविधा, लेबर, कांटा लोडिंग-अनलोडिंग नहीं कराया जा रहा है। मौके पर परेशान मिले किसानों ने बताया कि 25 रूपये प्रति कुंतल लेबर के नाम पर तथा धान गीले एवं सूखे के नाम पर 2किग्रा प्रति क्विंटल अतिरिक्त वसूला जा रहा है। डिप्टी एआरएम राजेश्वर प्रताप सिंह पर आरोप लगाते हुए लिखा गया है कि वे स्वयं को मुख्यमंत्री जी का करीबी बताते हैं जिसके कारण उनके अधीनस्थ कर्मचारी भी मनमानी पर आमादा रहते हैं। पत्र में डिप्टी एआरएम पर विपक्षी राजनीतिक दलों से सांठगांठ होने का अंदेशा जताते हुए उनके द्वारा एक ही राइस मिलर एवं मंडी के बिचैलियों के माध्यम से निर्धारित धान की खरीद की जाने का भी आरोप लगाया गया है।

 
 
   
 
 
 
                               
 
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