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मायावती कर रही किसानों से गोली से बात
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Source: U.P.Samachar Sewa, www.upwebnews.com

Publised on : 2011:05:10     Time 22:20             Update on  2011:05:10      Time 22:20

पूरा पश्चिमी उत्तर किसान विद्रोह की ज्वाला में धधक रहा

सुभाष सिंह

उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार जनता की सेवा की बजाय अब प्रापर्टी डीलर बन चुकी है। ऐसी प्रापर्टी डीलर जो किसानों से विकास के नाम पर औने-पौने दाम पर उनकी उर्वर भूमि ले रही है और उसे एक खास औद्योगिक घराने को ऊंचे दाम पर बेच रही है। यही घराना उन्हीं जमीनों को विकसित कर और टाउनशिप का रूप देकर करोड़ों में सौदा कर रहा हैं। जहां किसान विरोध कर रहा है उससे सरकार वार्ता करने की बजायगोलियों से बात की जा रही है। करछना (इलाहाबाद), टप्पल (अलीगढ़), शताब्दीनगर(मेरठ), बझेड़ा खुर्द (हापुड़), बाजना (मथुरा), एत्मादपुर (आगरा) और भट्टा, पारसौल(गौतमबुद्धनगर-नोएडा) पिछले तीन-चार साल से जंग का मैदान बन चुके हैं। किसान जब भी अपना हक मांगता है, उसे गोली मिलती है, जान-माल का नुकसान उठाना पड़ता है। यूं तो कई विकास योजनाओं में किसानों की जमीन गई या जा रही है लेकिन माया सरकार की चहेती जेपी एसोसिएट्स की यमुना एक्सप्रेस वे योजना तो उनके लिए काल बनकर सामने आयी है।जमीनों के अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर पिछले पांच- छह सालों में संघर्ष के दौरान15 किसानों की जान जा चुकी है। करीब 30 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं।

ताजा संघर्ष गौतमबुद्ध नगर के भट्टा, पारसौलमें हुआ जहां अपना हक मांग रहे किसानों पर पुलिस ने गोली चलाई जिसमें पांच किसानोंकी जान चली गई। ये सभी किसान 17 जनवरी 2011 से ही अधिक मुआवजे की मांग को लेकरआंदोलनरत थे। उनकी नहीं सुनी गई। उल्टे उन पर दमन चक्र चला दिया गया। पुलिस ने सातमई को उन पर अकारण कहर बरपाना शुरू कर दिया तो वे भी हिंसक हो उठे। आपसी संघर्षमें तीन पुलिस वाले भी मारे गए। वहां जिलाधिकारी समेत कई अधिकारी भी हिंसा काशिकार हो गए। किसानों की खुद्दारी के सामने प्रशासन दिन में तो नहीं टिक सका लेकिनरात 12 बजे के बाद उसने अपना वीभत्स रूप दिखाया। भट्टा, पारसौल और आच्छेपुर गांवपर पुलिस और पीएसी कहर बनकर टूट पड़ी। गांवों की गलियों में स्थानीय निवासियों कोदौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। पुलिस वाले चूल्हे, तवे और दूसरे सामान अपने साथ लेते गए।इन गांवों के अलावा आसपास के कई गावों के किसान घर छोड़कर पलायन कर चुके हैं। कईदिन तक इन गांवों में चूल्हे नहीं जले।

हिंसक संघर्ष की आग पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेशमें फैल चुकी है। नोएडा में मारे गए किसानों की सूचना एत्मादपुर (आगरा) में जेपी समूह द्वारा अधिग्रहीत जमीन पर मंदिर तोड़ने के लिए आंदोलनरत किसानों तक पहुंची तो आठ मई को जेपी के शिविर कार्यालय में आग लगा दी गई। यहां छह मई को एक शिव मंदिर तोड़ दिया गया था। किसानों ने कार्यालय में रखे गए जेनरेटर को आग लगी दी। जेपी समूह के कर्मचारियों को मार भगाया। पुलिसवाले आए तो उनके भिड़ंत हो गई। उन्हें किसानों की शक्ति के आगे झुकना पड़ा, वे भाग खड़े हुए। पुलिस ने यहां भी फायरिंग शुरू कर दी। भड़के किसानों ने स्थानीय पुलिस क्षेत्राधिकारी और उपजिलाधिकारी को पीट दिया। इस संघर्ष में कई किसान भी जख्मी हो गए।

किसानों के जायज विद्रोह की आग पूरे उत्तरप्रदेश में फैलती जा रही है। कारण साफ है। किसान विकास तो चाहता है लेकिन अपनी उर्वर धरती मां को औने-पाने दाम पर किसी औद्यौगिक घराने को लाभ पहुंचाने की कीमत पर नहीं। अब तक जितनी भी सरकारें रहीं, सबने उसके साथ छल ही किया है। विकास के नाम चंद रुपये देकर उनके जीवन का आधार जमीन ही छीन ली गई। पहले किसान चुप रहता था लेकिन अब वह चुप रहने वाला नहीं है। गौतमबद्धनगर हो या मथुरा, बुलंदशहर, अलीगढ़,हापुड़, मेरठ, आगरा, करछना (इलाहाबाद) हो,किसानों ने तय कर लिया कि अगर उनकी जमीन ली जाएगी तो उसका पूरा मुआवजा चाहिए।गौतमबुद्धनगर में किसानों की जमीन का मुआवजा 800 रुपये प्रति वर्गमीटर तय किया गयाहै लेकिन बताते हैं उसे विकसित कर 18 हजार प्रति वर्ग बेचे जाने की योजना है। इतनाबड़ा फासला। किसानों को यह मंजूर नहीं।

किसानों को कुचलने का काम तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने भी किया है हालांकि अब उनके बोल बदल चुके हैं। अब वह किसानों का हमदर्द बनकर सामने आ रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार किसानों पर दमनचक्र चला रही है। 2005 और 2006 में वह प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। तब भी किसान अपनी जमीन बचान ेके लिए सड़क पर उतरे थे। 2005 में मेरठ में किसानों पर पुलिस का दमनचक्र चला था।उसमें आठ किसान जख्मी हो गए थे। 2006 में पुलिस पिटाई और फायरिंग में 23 किसान बुरी तरह घायल हो गए थे। बाद में मई 2007 में मायावती मुख्यमंत्री बनीं। उसी साल  घोड़ी बछेड़ा में पुलिस की गोली से पांच किसानों की मौत हो गई। 2009 में बाजना (मथुरा) में पुलिस फायरिंग में एक किसान को जान गंवानी पड़ी। अलीगढ़ के टप्पल में चार किसान मारे गए। करछना (इलाहाबाद) में एक और भट्टा, पारसौल में पांचकिसानों की मौत पुलिस की गोली से हुई।

किसान नेता तेवतिया पर 50 हजार का इनाम

मायावती सरकार कुछ भी कर सकती है। हालांकि उनकी पार्टी बसपा में अपराधियों की बहुतायत है, कई जेल मेंहैं, बिलसी से बसपा विधायक फरार हैं, स्थानीय स्तर पर न्यायालय उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी कर चुकी है। लेकिन पुलिस उनको नहीं खोज पा रही है या यूं कहिए कि नहीं खोज रही है। ऐसे दागी लोगों पर ध्यान देने की बजाय सरकार अपने अभियान में रोड़ा बने किसानों के हमदर्द और उनके नेता मनवीर सिंह तेवतिया को अपराधी घोषित कर चुकी है। उनको पकड़ने के लिए 50 हजार का इनाम घोषित कर चुकी है। वह मूल रूप से बुलंदशहर के रहने वाले हैं। भट्टा, पाससौल के किसानों की भी वही अगुवाई कर रहे हैं। प्रदेश में डेढ़ दर्जन शातिर बदमाशों को खोजने के लिए सरकार की ओर से 50-50हजार का इनाम घोषित किया गया है। अब तेवतिया को इन्ही शातिर बदमाशों की श्रेणी में डाल दिया गया है। मुन्ना बजरंगी जैसे खूनी और हत्यारे को खोजने में लगी एसटीएफ(स्पेशल टास्क फोर्स) को अब तेवतिया के पीछे लगा दिया गया है। विशेष पुलिस महानिदेशक वृजलाल ने तो पत्रकारों से वार्ता तक में तेवतिया को अपराधी घोषित कर दिया। उनका कहना है कि एक दर्जन से अधिक संगीन अपराधों में तेवतिया की संलिप्तता है। सरकार यह कैसे भूल गई कि अभी कुछ समय पहले ही वह अलीगढ़, आगरा और मथुरा के किसानों को मनाने के लिए तेवतिया से ही संपर्क कर रही थी। उनकी हर बात ध्यान से सुनती थी। अब उसकी नजर में तेवतिया बड़े अपराधी हो गए हैं। आजादी के बाद के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी किसान नेता को अपराधी घोषित कर खोजने के लिए 50 हजार रुपये का इनाम रखा दिया गया हो।



अब हुए भूमिअधिग्रहण

एक-1,500 एकड़-लखनऊ,कानपुर और गाजियाबाद में टाउनशिप के लिए
दो-8,000 एकड़ जमीनपश्चिमी उत्तर प्रदेश में विशेष जोन बनाने के लिए
तीन-1,500 एकड़गाजियाबाद में हाईटेक टाउनशिप के लिए
चार-30,000 एकड़जमीन गंगा एक्सप्रेस वे कारिडोर के लिए
पांच-43,000 एकड़यमुना एक्सप्रेस वे के लिए अधिग्रहीत
छह-2.400 एकड़ जमीनगौतमबुद्धनगर परियोजना के लिए


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