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साक्षात्कार/चम्पतराय,अन्तरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष विश्व हिन्दू परिषद्  / 21.11.2019

विहिप की अगली पीढ़ी तय करेगी नए आन्दोलन की प्राथमिकताः चम्पतराय
Publised on :  21 November 2019 Time: 22:10  Tags: Interview with Champat Rai by Sarvesh Kumar Singh

Champat Rai, Vice President of Vishva Hindu Parishad VHP

विश्व हिन्दू परिषद् के अन्तरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री चम्पतराय लगभग 40 वर्ष से संगठन के काम में जुटे हैं। श्री रामजन्मभूमि आन्दोलन के आरम्भ से आपका इससे जुड़ाव रहा है। आन्दोलन की रूपरेखा, व्यवस्था और संचालन सभी में चम्पतराय जी की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। अयोध्या मामले का अदालत में पर्यवेक्षण और इसे सफलता तक पहुंचाने में विहिप के जिन प्रमुख नेतृत्वकर्ताओं की प्रमुख भूमिका रही, उनमें चम्पतराय जी की नाम सबसे प्रमुख है। श्री रामजन्मस्थान के पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आने के बाद 21 नवम्बर 2019 को विहिप के लखनऊ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय रामभवन में स्वतंत्र पत्रकार सर्वेश कुमार सिंह ने चम्पतराय जी विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश-

प्रश्न: श्री रामजन्मभूमि की लड़ाई जीत ली है, लक्ष्य पूर्ण हो गया है। अब विहिप क्या करेगी?

उत्तर: विश्व हिन्दू परिषद् का जन्म जिन कामों के लिए हुआ है, अब वे सब कार्य करेंगे। इनमें पहला है-अस्पृश्यता निवारण अर्थात सामाजिक समरसता। देश में रहने वाला दूसरा - प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह हिन्दू हो अथवा मुसलमान अपनी जड़ों से जुड़े। सभी यह अनुभव करें और समझें कि उनके पूर्वज हिन्दू थे। तीसरा-देश के सभी नागरिकों में चाहे वह बहुत गरीब हों अथवा बहुत अमीर हों, उनके मन में समान रूप से हिन्दुत्व का भाव प्रबल हो। चौथा - हिन्दू परंपरा की रक्षा हो, हिन्दू जीवन मूल्यों की रक्षा हो। पांचवा देश में जातीयता के स्थान पर हिन्दू भाव जगे। हम हिन्दू हैं इसलिए हमारी जातियां हैं,यह भाव प्रबल करना है। छठा दुनिया भर में जहां भी हिन्दू हैं वह यह मानें कि भारत उनके पूर्वजों की धरती है और इससे जुड़कर रहें।

प्रश्न:  श्री रामजन्मभूमि मुक्ति के लिए जब आन्दोलन शुरु हुआ तो श्रीकृष्णजन्मभूमि मथुरा, काशी विश्वनाथ वाराणसी के धर्मस्थानों की मुक्ति के लिए भी प्रस्ताव पारित हुआ था। क्या अब विहिप ने इन दो स्थानों की मांग को छोड़ दिया है?

उत्तर:  पहले एक काम जो शुरु किया है वह पूरा हो जाए। राम मन्दिर बन जाए, प्राण प्रतिष्ठा हो जाए, फताका फहर जाए। श्री रामजन्मभूमि के लिए हमने लम्बी लड़ाई लड़ी है। इसे समाज के सामने सफलता पूर्वक दिखाना है। हमने कोई मांग छोड़ी नहीं है, लेकिन यह काम पूरा होने के बाद प्राथमिकता तय की जाएगी। विश्व हिन्दू परिषद् जीवन्त संगठन है। जीवंत संगठन की प्राथमिकताएं बदलती भी हैं। विहिप की अगली पीढ़ी तय करेगी कि प्राथमिकता क्या होगी। सब कुछ एक ही पीढी तय नहीं कर सकती। कोई मांग छोड़ी नहीं गई है, किन्तु प्राथमिकता समय के अनुसार तय की जाएगी।

समाज का कार्य विचारवान, संवेदनशील लोगों का कार्य है। समाज की आवश्यकताएं समय-समय पर अलग-अलग रहती हैं। इसलिए प्राथमिकताएं भी परिस्थितियां तय करती हैं।

प्रश्न: मन्दिर निर्माण के लिए प्रस्तावित ट्रस्ट का स्वरूप क्या होगा? क्या सरकार ने विहिप से इस सम्बन्ध में कोई बात की है?

उत्तर: ट्र्स्ट को लेकर  हमारे मन में किसी तरह का अविश्वास या तनाव नहीं है। सरकार जो तय करेगी वह ठीक ही होगा। सरकार में आज जो लोग शामिल हैं, वे कभी न कभी श्री रामजन्मभूमि आन्दोलन से जुड़े रहे हैं। इसलिए उन्हें मालूम है कि क्या करना है। उन्हें कुछ भी बताने की जरूरत नहीं है।

विश्व हिन्दू परिषद् के उपाध्यक्ष चम्पताराय जी से बातचीत करते हुए पत्रकार सर्वेश कुमार सिंह

प्रश्न: श्रीरामजन्भूमि आन्दोलन शुरु कैसे हुआ? आन्दोलन में मुरादाबाद की क्या भूमिका है ?

उत्तर: मुरादाबाद की देन है, श्रीरामजन्मभूमि आन्दोलन। दाऊदयाल खन्ना मुरादाबाद के ही थे। पांच बार कांग्रेस से विधायक रहे। चन्द्रभानु गुप्त की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे। उन्होंने ही हिन्दू समाज का आह्वान किया था, श्रीरामजन्मभूमि की मुक्ति के लिए। मुजफ्फरनगर में छह मार्च 1983 को हिन्दू सम्मेलन हुआ। इसमें धर्मस्थानों की मुक्ति के लिए दाऊ दयाल खन्ना ने प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। इस सम्मेलन की अध्यक्षता गुलजारी लाल नन्दा ने की थी। स्वयं रज्जू भैया सम्मेलन में थे। इस हिन्दू सम्मेलन का आयोजन मुरादाबाद के पूर्व विभाग प्रचारक और हिन्दू जागरण मंच के पश्चिम उत्तर प्रदेश के  संयोजक दिनेश चन्द्र त्यागी ने ही किया था।

इस सम्मेलन के बाद ही धर्म स्थानों की मुक्ति के लिए धर्म स्थान मुक्ति यज्ञ समिति बनी थी। बाद में इसका नाम बदलकर श्रीरामजन्मभूमि मुकित् यज्ञ समिति कर दिया गया था। इस समिति के अध्यक्ष गोरक्षपीठाधीश्वर महन्त अवैद्यनाथ और महामंत्री दाऊदयाल खन्ना और मंत्री दिनेश चन्द्र त्यागी थे।

News source: U.P.Samachar Sewa

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