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राजनीतिक सुनामीःपनामा पेपर्स लीक्स
के.पी.सिंह
Publised on : 16 April 2016,  Last updated Time 23:30                     Tags: Panama Papers Leaks

नामा पेपर्स ने पूरी दुनिया को सुनामी जैसे राजनैतिक, सामाजिक ज्वार की चपेट में ला दिया है। इन दस्तावेजों ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कैमरून के अलावा रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी चिन पिंग के नजदीकियों के साथ-साथ 12 वर्तमान और पूर्व राष्ट्र प्रमुखों के अपतटीय निवेश का खुलासा किया है। लेकिन अमेरिकी प्रशासन की किसी हस्ती का नाम इसमें नही है जो अचरजभरा पहलू है। 500 भारतीयों के भी नाम इस खुलासे मे शामिल हैं जिनमें स्वयंभू मिलेनियम स्टार अमिताभ बच्चन और उनकी बहू ऐश्वर्या राय प्रमुख हैं। जाहिर है कि इनमें से अधिकांश भारतीय हस्तियां विदेशों में अपने किसी भी गुप्त व गैरकानूनी निवेश को नकार चुकी हैं।
क्या है पनामा पेपर्स
पहले यह जान लें कि पनामा पेपर्स यानी दस्तावेज है क्या। पनामा की एक ला कंपनी है-मौसेक फोसेंका जिसके दुनियां के 35 देशों में दफ्तर हैं। यह दुनियां भर की तमाम कंपनियों के स्याह-सफेद कारोबार को वैध बनाने के दस्तावेज तैयार करने में मदद करती है। इनमें से कई छदम कंपनियां हैं जिनका अस्तित्व पेपर्स के अलावा कहीं नही है। जर्मनी के एक अखबार को मौसेक फोसेंका के क्लांइटों के डेढ़ करोड़ दस्तावेज किसी तरह हाथ लग गये। खोजी पत्रकारिता के अंतर्राष्ट्रीय गठजोड़ से संबद्ध 100 से अधिक मीडिया संस्थानों के 370 पत्रकारों ने इन दस्तावेजों के आधार पर जब गहन पड़ताल की तो विभिन्न देशों के 140 से अधिक राजनीतिज्ञों और फिल्मी, खेलजगत, माॅडलिंग व अन्य क्षेत्रों से जुड़े दिग्गजों के अघोषित इनवेस्टमेंट की जानकारियां सामने आईं हैं। खोजी पत्रकारिता के अंतर्राष्ट्रीय गठजोड़ ने यह भी घोषणा की है कि मई में कई और खाता धारकों और निवेशकों के नाम उजागर किये जायेंगे। जिससे पनामी लीक्स सुनामी के थपेड़े झेल रहे देशों की सरकारें सांसत में हैं और समय रहते कार्रवाई के नाम पर क्राइसिस मैनेजमेंट में जुट गई हैं।
भारत में एसआईटी ने शुरू की जांच
भारत सरकार ने पनामा दस्तावेजों में जिन भारतीयों के नामों की चर्चा की गई है उनके बारे में जांच 2014 में उच्चतम् न्यायालय के आदेश पर काले धन का पता लगाने के लिए गठित सेवानिवृत्त न्यायाधीश एमबी शाह के नेतृत्व वाली स्पेशल इनवेस्टीगेटिव टीम (एसआईटी) को सौंप दी है। साथ ही आर्थिक और वित्तीय मामलों से जुड़ी कई एजेंसियों का समूह भी इसके लिए गठित कर दिया है। इसके पहले एसएसबीसी बैंक के संदिग्ध खातों स्विस खुलासे व पत्रकारों के अंतर्राष्ट्रीय गठजोड़ द्वारा पूर्व में उपलब्ध कराई गई संदिग्धों की सूची के नामों के खिलाफ हुई अभी तक की कार्रवाई के बारे में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पनामा लीक्स के तुरंत बाद पत्रकारों को वृहद जानकारी दी तांकि जनमानस को काले धन के मामले में सरकार की सक्षमता का भरोसा हो सके। हालांकि कार्रवाइयों में दबोचे गये लोगों में कोई ऐसा बड़ा नाम नही है जो भरोसे के मामले में लोगों को संतुष्ट करने वाला हो।
पनामी लीक्स सुनामी के पीछे साजिश ?
इराक की तबाही के बाद साबित हुआ कि वहां के पूर्व राष्ट्रपति सददाम हुसैन को रासायनिक हथियारों के शैतान के रूप में पेश किया जाना एक फरेब था। मिश्र में कुछ वर्ष पहले हुई उथल-पुथल को क्रांति के बसंत के रूप में प्रस्तुत किये जाने का खोखलापन उजागर होने के बाद दुनियां समझ पाई कि यह सुनियोजित अमेरिकी प्रोपोगंडा था। पनामा लीक्स को लेकर भी चर्चा हो रही है कि इसके पीछे कहीं अमेरिका की शातिर खुफिया एजेंसी सीआईए का खेल तो नही है। जो अमेरिका विरोधी देशों में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए खेला गया हो। अगर यह सुनामी विश्व स्तर पर किसी मजबूत और अभेद्य आर्थिक नियमन की परिणिति पर नही पहुंचती तो यह आशंका सिद्ध मानी जायेगी।
काले धन को रोकने में निरुपाय है सरकारें
काले धन की दुनियां वैध आर्थिक और वित्तीय संसाधनों से बड़ी है। अगर इसका अंत हो जाये तो प्रगति का लाभ सभी को समान रूप से उपलब्ध कराकर सुखमय संसार के निर्माण की कल्पना पूरी हो सकती है। काला धन नही रहेगा तो सार्वजनिक विकास के लिए सरकारों के पास संसाधनों की ज्यादा से ज्यादा पूर्ति होगी। नैतिक अराजकता के माहौल का अंत होगा। जिससे उन्नत सभ्यता की सार्थक अनुभूति लोग कर सकेंगे। अभाव जैसी विसंगति का स्थाई तौर पर समाधान हो जायेगा। पर यह आसान नही है। दुनियां में करों से जुड़ी जानकारियों के आदान-प्रदान के 500 से ज्यादा समझोते हो चुके हैं लेकिन फिर भी काले धन को लेकर सरकारें असहाय हैं। पनामा लीक्स कहीं संदिग्धों को मुलायम सिंह की तरह अपने को सीबीआई से प्रमाणित ईमानदार बताने जैसा अवसर उपलब्ध न करा दें। विदेशों में गुप्त खातों को अवैध साबित करना जानकार अभी भी बेहद कठिन मानते हैं। कानूनी ज्ञान की महारत बढ़ने से सरकारें तो कारगार नही हुई लेकिन आर्थिक अपराधियों को बेहतर रक्षा कवच जरूर मिल गया। मुलायम सिंह यादव ने खुली सभा में उत्तर प्रदेश सरकार के खनिज मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति से कहा कि अपने कागजात मेरी तरह दुरुस्त तरीके से बनवा लेना सीबीआई तुम्हारा कुछ नही बिगाड़ पायेगी। मौसेक फोसेंका जैसी लाॅ कंपनियों के रहते दुनियां की सरकारी आर्थिक एजेंसियां धन शोधन के खिलाड़ियों का बालबांका कर पायेगी यह लगता नही है। फिलहाल तो पनामा दस्तावेजों ने सनसनीखेज शोशेबाजी का काम किया है। जिसके रोमांच का मजा खूब लिया जा रहा है।

के.पी.सिंह

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News source: U.P.Samachar Sewa

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