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बदल चुकी है 36 बसंत देख चुकी भाजपा
अटल आडवाणी जोेशी की जगह ली मोदी शाह की जोडी ने
श्रीधर अग्निहोत्री
Publised on : 06 April 2016,  Last updated Time 22:25                     Tags: BJP

अपने जन्म के 36 बसन्त देख चुकी भारतीय जनता पार्टी ने अपने जीवनकाल मेें कई उतार चढाव देखे। कभी वह सत्ता से दूर रही तो कभी सत्ता में कभी सरकार में रही तो कभी बाहर रहकर समर्थन दिया। लेकिन भाजपा के स्वभाव में जो परिवर्तन 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद लोगों को लगा कि अब तो भाजपा पूरी तरह से बदल चुकी है।हालांकि आज की भाजपा का जन्म तो 1951 में जनसंघ के रूप् में डा श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने कानपुर के ऐतहासिक फूलबाग में मैदान में अटल विहारी वाजपेयी की उपस्थिति में की थी लेकिन उस समय कांग्रेस के जमाने में जनसंघ संघर्ष ही करती दिखी।
1969 में जब यूपी में चुनाव हुए तो जनसंघ को मिली सीटों से प्रदेश में साझा सरकार बनी जिसमें जनसंघ भी शामिल हुई। इस चरण में जनसंघ ने 5 चुनाव लड़े और उसका वोट प्रतिशत 3.07 से 7.36 के बीच रहा। 1967 में 9 राज्यों में कांग्रेस सत्ता विहीन हुई और मिलीजुली सरकारें बनी। इसके बाद 1973 से 1980 तक देश में कई घटनाएं हुई जिसके बाद बनी जनता पार्टी ने देश की सत्ता संभाली लेकिन 30 महीने की सरकार के गिरने के बाद जब जनता पार्टी की 1980 के चुनावों में करारी हार हुयी तो जनता पार्टी का पूरी तरह से विघटन हो गया। जनसंघ फिर से अलग हुआ और आरएसएस के निर्देश पर अटल बिहारी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी अस्तित्व में आई. 1980 के दिसंबर महीने में मुम्बई में भारतीय जनता पार्टी ने अपना पहला अधिवेशन किया और अटल बिहारी वाजपेई इसके पहले अध्यक्ष हुए।
इसके बाद 1984 में जब भाजपा अपनी तरुणावस्था में थी और देश में लोकसभा चुनाव होने वाले थे तभी इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद उपजे सहानुभूति ने 1984 में कांग्रेस को एतिहासिक जीत दिला दी और भाजपा इस सहानुभूति के तूफ़ान का शिकार हो गयी। लोकसभा में पार्टी को महज 2 सीटो से संतोष करना पड़ा. इसके बाद राजीव गांधी के खिलाफ बोफोर्स मामले के सामने आने के बाद लालकृष्ण आडवाणी ने मोर्चा सम्हाला और राजीव विरोधी लहर में हुए 1989 के चुनावो में भले ही वीपी सिंह के जनता दल ने सरकार बनायीं जिसके बाद मगर भाजपा की सीटें 2 से बढ़ कर 89 हो गय।
इस बीच पार्टी में डा. मुरली मनोहर जोशी का उदय हुआ। अटल आडवाणी की जोड़ी अब अटल, आडवाणी और जोशी की तिकड़ी में बदल गयी। भाजपा का यही दौर उसके उफान का दौर था जब देश में मंडल आयोग के विरोध में आडवाणी ने राममंदिर आंदोलन चलाया। इसके बाद भाजपा देश भर में चर्चा में आई। इस बीच पार्टी ने कई उतार चढाव देखे लेकिन 2014 के आम चुनावो में अमित शाह और मोदी की जोड़ी ने भारतीय चुनावो के सारे समीकरण बदल दिए. और उत्तर प्रदेश में 71 सीटे पाने वाली भाजपा ने कुल 272 सीटे जीतकर केन्द्र में सत्ता हासिल की।

News source: U.P.Samachar Sewa

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